बैंगलोर

निजी क्षेत्र को ध्रुव हेलीकॉप्टर की तकनीक देने की तैयारी

सार्वजनिक क्षेत्र की विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने तकनीकी हस्तांतरण के जरिए उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) धु्रव के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्रों की एक कार्यशाला आयोजित की।
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Jul 01, 2019
निजी क्षेत्र को ध्रुव हेलीकॉप्टर की तकनीक देने की तैयारीb
निजी क्षेत्र को ध्रुव हेलीकॉप्टर की तकनीक देने की तैयारी

बेंगलूरु. सार्वजनिक क्षेत्र की विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने तकनीकी हस्तांतरण के जरिए उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) धु्रव के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्रों की एक कार्यशाला आयोजित की। एचएएल ने इस हेलीकॉप्टर की डिजाइनिंग की है और वहीं इस हेलीकॉप्टर का ओरिजनल इक्विपमेंट मैनुफैक्चरर (ओइएम) है।

उन्नत नागरिक हेलीकॉप्टर धु्रव अत्याधुनिक एवियोनिक्स एवं ग्लास कॉकपिट से सुसज्जित है तथा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के सर्टिफिकेशन के तहत उत्पादित होता है। इस अवसर पर रक्षा उत्पादन सचिव डॉ. अजय कुमार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में इस नागरिक हेलीकॉप्टर के विपणन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया।


उन्होंने कहा कि देश में निजी क्षेत्रों के पास बेशुमार अवसर हैं और उसे साझेदारी के जरिए इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। निजी क्षेत्र को सकारात्मक सोच के साथ आगे आना होगा। उन्होंने एचएएल को भी सुझाव दिया कि औद्योगिक साझीदारों की ओर से प्रस्तावित कुछ सुझावों पर उसे गौर करना चाहिए।


एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आर. माधवन ने कहा कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में धु्रव हेलीकॉप्टर की अपार संभावनाएं हैं। एचएएल इसका ओइएम और लाइसेंस धारक है। भारतीय उद्योग इसके उत्पादन के लिए साझीदारी कर काफी लाभ उठा सकते हैं। इससे देश में एयरोस्पेस इकोसिस्टम तैयार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल देश में 600 नागरिक हेलीकॉप्टरों की जरूरत है।


इससे पहले कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने फीडबैक और सुझाव एचएएल को दिए। इससे पहले एचएएल ने अप्रेल 2019 में रिक्वेस्ट फॉर कोटेशन (आरएफए) जारी किया था। इस सौदे के तहत चयनित भारतीय साझीदार को हेलीकॉप्टर के पूरे जीवनकाल तक यानी 20 वर्षों तक ग्राहकों को सेवा देने का मौका मिलेगा। इससे दीर्घकालिक कारोबारी संबंध स्थापित होंगे।


इस कार्यशाला में एसोचैम, फिक्की, सीआइआइ, सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैनुफैक्चरर (एसआइडीएम), कर्नाटक राज्य विकास परिषद, कर्नाटक उद्योग मित्र को भी आमंत्रित किया गया था। गौरतलब है कि धु्रव एचएएल द्वारा स्वदेशी तकनीक से तैयार 5.5 टन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है। यह रक्षा और नागरिक सेवाओं में उपयोगी है। इस हेलीकॉप्टर ने 2.4 लाख उड़ान घंटे पूरे कर लिए हैं।

Published on:
01 Jul 2019 11:54 pm