
बेंगलूरु. वायुसेना के लिए खरीदे जाने वाले अत्याधुनिक रफाल युद्धक के ऑफसेट ठेका से एकमात्र सरकारी विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को वंचित किए जाने को लेकर हमलावर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार पर एचएएल मुख्यालय के सामने से निशाना साधेंगे।
यहां एचएएल कॉरपोरेट ऑफिस के ठीक सामने मिंस्क स्क्वायर पर एचएएल द्वारा तैयार हल्के लड़ाकू विमान तेजस की प्रतिकृति लगाई गई है और राहुल गांधी के नेतृत्व में वहीं पर धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। राहुल इस धरने में करीब डेढ़ घंटे तक रहेंगे और एचएएल के पूर्व कर्मचारियों से बातें भी करेंगे। इस दौरान देश के विकास में एचएएल के योगदानों की चर्चा तो होगी ही लेकिन रफाल सौदे से एचएएल को वंचित किए जाने के नुकसान पर ज्यादा फोकस होगा। प्रदेश कांग्रेस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार राहुल गांधी दिन में 1.45 बजे शहर के कैंपेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगे और 10 मिनट बाद वहां से प्रस्थान करेंगे। वे दोपहर 2.30 बजे कुमारकृपा अतिथि गृह पहुंचेंगे जहां लगभग 45 मिनट बिताएंगे और इस दौरान प्रदेश के नेताओं से उनकी बातचीत होगी। दोपहर 3.30 बजे राहुल मिंस्क स्क्वायर पहुंचेंगे और शाम 5 बजे तक धरना स्थल पर रहेंगे। शाम 6 .25 बजे वे पुन: बेंगलूरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे। दरअसल, राहुल गांधी के कार्यक्रम में कई बार बदलाव हुए हैं। इससे पहले उनका एचएएल कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ चर्चा का कार्यक्रम था लेकिन कर्मचारी संघ ने राहुल से मिलने से इनकार कर दिया। संघ के सदस्यों का कहना है कि वे सरकारी कर्मचारी हैं और किसी सरकारी कार्यक्रम में भाग नहीं ले सकते हैं। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों का कहना है कि लगभग 200 एचएएल कर्मी मिंस्क स्क्वायर पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कांग्रेस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए पुलिस व अन्य संबंधित एजेंसियों से अनुमति ली जा चुकी है।
रफाल तैयार करना एचएएल के लिए मुश्किल नहीं: कर्मचारी संघ
भले ही एचएएल कर्मचारी संघ ने राहुल गांधी से मिलने से इनकार किया है लेकिन रफाल सौदे में ऑफसेट ठेका नहीं मिलने पर निराशा जताई है। एचएएल कर्मचारी संघ के महासचिव सूर्यदेवराय चंद्रशेखर ने कहा कि वे इस संदर्भ में संघ की ओर से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह करेंगे कि एमएमआरसीए सौदे (110 विमानों की खरीदारी) में एचएएल को नजरअंदाज नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि रफाल सौदे का ऑफसेट ठेका उम्मीदों के मुताबिक एचएएल को मिलना चाहिए था लेकिन नहीं मिला। इसके बाद एचएएल की योग्यता और क्षमता पर भी सवाल उठाए गए कि क्या एचएएल रफाल विमान तैयार कर सकता है। लेकिन, वे कहना चाहते हैं कि एचएएल निश्चित तौर पर रफाल युद्धकों का उत्पादन कर सकता है। सुखोई, तेजस, जगुआर जैसे युद्धकों का उत्पादन यहां हो रहा है वहीं मिराज विमानों की ओवरहॉलिंग भी कर रहे हैं। जब यह कंपनी इन बड़े विमानों का उत्पादन कर सकती है तो रफाल का उत्पादन भी कर सकती है। जहां तक राहुल गांधी से मिलने की बात है तो एक विशेष मंच पर उनसे नहीं मिल सकते क्योंकि वे सरकार के कर्मचारी हैं। एचएएल कर्मचारी सरकार और प्रधानमंत्री का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे रक्षा मंत्री की भी अगुवाई करते हैं। रक्षा मंत्री ने एचएएल के प्रति काफी सकारात्मक रुख दिखाया है और कहा है कि वे भविष्य में कंपनी के लिए पर्याप्त आर्डर सुनिश्चित करेंगी।