मरुधर केसरी मिश्रीमल की 128वीं व रूपमुनि की 94वीं जयंती
बेंगलूरु. साध्वी संयमलता, अमितप्रज्ञा, कमलप्रज्ञा, सौरभप्रज्ञा आदी ठाणा-4 के सान्निध्य में मरुधर केसरी मिश्रीमल की 128वीं व रूपमुनि की 94वीं जयंती निमित्त गुणानुवाद एवं सरला जम्बुकुमार दुग्गड़ के मासखमण तप की पूर्णाहुति पर अभिनंदन समारोह के साथ 1008 सामयिक के बेले की आराधना का कार्यक्रम संपन्न हुआ। वरघोड़ा निकाला गया। धर्म सभा में साध्वी संयमलता ने कहा कि मरुधर केसरी मिश्रीमल ने दया, अहिंसा और परमार्थ के कार्यों से देश व समाज की दशा सुधारी थी।
रूप मुनि आत्मबल और मनोबल के धनी थे। तपस्या करना शूरवीरों का काम है। साध्वी अमितप्रज्ञा ने कहा कि गुरु ब्रह्मा हैं, विष्णु हैं, गोविंद और भगवान समान हैं। साध्वी कमलप्रज्ञा ने भक्तिमय प्रस्तुति दी। साध्वी सौरभप्रज्ञा ने भी श्रद्धासुमन समर्पित किए। तपस्वी सरला जम्बुकुमार दुग्गड़ के मासखमण तप की पूर्णहति पर संघ ने अभिनंदन पत्र, रजत यंत्र एवं चुनड़ी से अभिनंदन किया। नवयुवक मंडल, जैन मित्र मंच, ब्राह्मनी कन्या मंडल ने तपस्वी का बहुमान किया। सोहनलाल बाघमार, दनमल मेहता, महावीर धोका, शीतल भंसाली, महेंद्र मुणोत, शीतल सोलंकी ने भी विचार व्यक्त किए। महिलाओं व कन्या मंडल ने गीतिका पेश की। समारोह में जैन कॉन्फ्रेंस के केसरीमल बुरड़, सुरेशचंद छल्लानी, कानमल छाजेड़, गौतमचंद धारीवाल, संपतराज दर्डा आदि उपस्थित थे। शाम को पैलेस ग्राउंड में गुरु भक्ति एवं तपोभिनंदन निमित्त भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। संचालन संघ मंत्री ज्ञानचन्द लोढ़ा ने किया।
माता की पिच्छी पर बांधी राखी
बेंगलूरु. विल्सन गार्डन स्थित शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में साध्वी विनिव्रता के सान्निध्य में रक्षाबंधन पर्व पर आचार्य विष्णु कुमार मुनि सहित 700 मुनिराजों की पूजा कर माता की पिच्छी पर राखी बांधी गई।
रक्षाबंधन है स्नेह और समर्पण का पर्व
तिरुमला. तिरुमला तिरुपति धाम में बालाजी चातुर्मास गोमंगल महोत्सव के अंतर्गत रक्षाबंधन उत्सव पर गोधाम पथमेड़ा के संस्थापक स्वामी दत्तशरणानंद ने कहा कि रक्षा बंधन का पावन पर्व मानव जाति को एक दूसरे के स्नेह, समर्पण एवं शुभकामनाओं के प्रति प्रेरित करने का पर्व है। इस अवसर पर श्रीवामन पूजन, अर्चन, भोग, शृंगार एवं आरती का आयोजन हुआ।