
बेंगलूरु
परमात्मा के प्रति सच्ची भक्ति में वह शक्ति है जिससे बिगड़े हुए कार्य भी स्वतः बनने लगते हैं। देवाधिदेव महादेव न केवल भाग्य बदलने की क्षमता रखते हैं, बल्कि वे मात्र एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं।यह विचार बालाजी मठ मंदिर लोकन्यास, ग्वालियर के अध्यक्ष भानु प्रताप दुबे ने व्यक्त किए। वे चिकपेट स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में आयोजित एक धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य नियमित रूप से परमात्मा में अपना अनुराग बढ़ाए, तो अशुभ ग्रहों की प्रतिकूल शक्ति स्वयं ही घटने लगती है और आत्मानंद का अनुभव शुरू हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह दिव्य आनंद मात्र महादेव की प्रसन्नता और कृपा से ही प्राप्त किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर माया, मोह और लोभ के जाल में फंसकर अपने जीवन के अमूल्य क्षणों को गंवा देता है। जब तक वह माया में आसक्त रहता है, उसे परमात्मा का स्मरण नहीं आता, लेकिन जब माया उसे धोखा देती है, तब उसे ईश्वर की याद आती है। उन्होंने भक्तों का आह्वान किया कि माया को मन से हटाएं और इसे अपने ऊपर हावी न होने दें। परमात्मा के नाम जप में ही सच्चा सुख निहित है। उन्होंने मंदिर परिसर में स्थानीय व्यापारी समूह के साथ नीलकंठ महादेव का विधिवत अभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की।
Updated on:
18 Apr 2026 07:58 pm
Published on:
18 Apr 2026 07:57 pm
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