
निर्जला एकादशी 2026: क्यों रखा जाता है बिना पानी का व्रत, जानिए भीम एकादशी की कथा (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Nirjala Ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म की सबसे कठिन और पुण्यदायी एकादशियों में मानी जाती है। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आने वाले इस व्रत में श्रद्धालु बिना अन्न और जल के भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि निर्जला उपवास रखने से सालभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। महाभारत में भीमसेन से जुड़ी इसकी कथा इसे और खास बनाती है।
निर्जला एकादशी पर व्रत (Nirjala Ekadashi Vrat) रखना किसी आम उपवास से बहुत अलग है। यह सिर्फ भोजन छोड़ने का उपवास नहीं, बल्कि आत्मसंयम और श्रद्धा की कठिन परीक्षा माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन बिना अन्न और पानी के, पूरा दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से बाकी साल की सारी एकादशियों का पुण्य एक साथ मिल जाता है। हिंदू परंपरा में इसी को सबसे कठिन, सबसे पुण्यदायी एकादशी कहा गया है।
हर एकादशी की अपनी अलग पहचान है, लेकिन निर्जला को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। निर्जला का मतलब है बिना पानी के व्रत करना। इस दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन तक एक बूंद पानी भी नहीं पीते। कई लोग कहते हैं कि ये मन और इंद्रियों की रास पकड़ने का तरीका है, जिससे इंसान आध्यात्मिक रूप से साफ-सुथरा हो जाता है।
धर्मग्रंथों में भी साफ लिखा है ये व्रत शरीर को दुख देने के लिए नहीं है, ये इच्छाओं और मोह पर काबू पाने का तरीका है। संत-महात्मा इसे तप और संयम का पर्व मानते हैं।
निर्जला एकादशी की जड़ें महाभारत में हैं. भीमसेन, जो खाने के बेहद शौकीन थे, बाकी भाइयों की तरह हर बार व्रत नहीं रख पाते थे. जब वेदव्यास ने उन्हें बताया कि एकादशी का व्रत मोक्ष और पुण्य देता है, तो भीम ने कहा मेरे लिए तो ये नामुमकिन है। उन पर वेदव्यास बोले अगर तुम सिर्फ साल में एक दिन, निर्जला एकादशी के दिन, पूरा उपवास रख लो तो बाकी एकादशियों का पुण्य तुम्हें भी मिल जाएगा।
भीमसेन ने वही किया ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को बिना अन्न और बिना पानी के व्रत रख लिया। तब से इस एकादशी को भीम एकादशी या “पांडव एकादशी” भी कहते हैं।
आध्यात्मिक जानकार बताते हैं कि निर्जला एकादशी असल में आत्मनियंत्रण का सबक देती है। गर्मी में पानी छोड़ना किसी खेल की बात नहीं है। श्रद्धालु के धैर्य और मानसिक शक्ति का असली इम्तिहान है ये।
इस दिन दान भी खूब होता है पानी से भरे घड़े, शरबत, फल, छाता आदि बांटने का चलन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दान-पुण्य करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य प्रमोद शर्मा ने बताया कि निर्जला एकादशी का सम्बन्ध भगवान विष्णु और सूर्य की ऊर्जा से भी है। ज्येष्ठ माह में आते हुए ये व्रत तपस्या और सूर्य की तपिश के बीच श्रद्धा की ताकत दिखाता है इस दिन व्रत और विष्णु सहस्रनाम का पाठ मानसिक तनाव घटाता है और नकारात्मकता दूर करता है. लेकिन डॉक्टर तो यही कहते हैं बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, या बीमार लोग बिना पानी वाला व्रत रखने से पहले सलाह जरूर लें।
आज के सोशल मीडिया और मॉडर्न लाइफस्टाइल के दौर में भी निर्जला एकादशी का असर कम नहीं हुआ। मंदिरों में खास पूजा, भजन-कीर्तन, और जलसेवा होती है। कई युवा भी इसे आत्मअनुशासन और मानसिक मजबूती के रूप में देखते हैं सिर्फ धार्मिक रस्म नहीं।
असल में निर्जला एकादशी यही सिखाती है कि जब मन पर काबू होता है, तब हर बड़ी तपस्या आसान लगने लगती है। यही वजह है कि यह पुरानी परंपरा आज भी लोगों की आस्था का मजबूत हिस्सा बनी हुई है।
Updated on:
04 Jun 2026 01:48 pm
Published on:
04 Jun 2026 01:48 pm
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