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चातुर्मास शुरू होने से पहले ज्योतिषाचार्य से जानिए पूजा, दान और व्रत से जुड़े अहम नियम

Devshayani Ekadashi 2026- देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होते ही भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं।जानिए किन कामों से मिलेगा विशेष पुण्य और किन गलतियों से बचना चाहिए।
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भारत

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Akash Dewani

Jul 23, 2026

Devshayani Ekadashi 2026 Vrat Niyam donations puja vidhi

Devshayani Ekadashi 2026 Vrat- तिषाचार्य से जानिए पूजा, दान और व्रत से जुड़े अहम नियम (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Devshayani Ekadashi 2026 Vrat Niyam- देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास (Chaturmas) की शुरुआत होती है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र समय माना गया है। इस अवधि में भगवान विष्णु और शिव दोनों की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस दौरान व्रत, जप, अभिषेक, भागवत कथा श्रवण और दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही एकादशी व्रत के दौरान कुछ ऐसे नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य धर्मेंद्र शास्त्री से जाने पूजा, दान और व्रत से जुड़े अहम नियम।चातुर्मास में पूजा और ध्यान करने का विशेष महत्व है। देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधनी एकादशी तक भगवान विष्णु विश्राम करेंगे। इस दौरान शिवजी सृष्टि का संचालन करेंगे। इन दिनों में शिवजी और विष्णुजी की पूजा करनी चाहिए।

चातुर्मास में कैसे करें भगवान शिव और विष्णुजी की पूजा

  • भगवान विष्णु और शिवजी का अभिषेक करना चाहिए.
  • विष्णुजी को तुलसी तो शिवजी को बिल्वपत्र चढ़ाने चाहिए।
  • साथ ही 'ॐ विष्णवे नम:' और 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • इन दिनों में भागवत कथा सुने।
  • जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करे।

सनातन में एकादशी का महत्व

ज्योतिषाचार्य शास्त्री बताते है कि देवशयनी एकादशी व्रत करने से पूरे साल की 26 एकादशीयो का पुण्य एक साथ मिलता है। प्रत्येक महीने में 2 बार एक कृष्णपक्ष व दूसरी शुक्लपक्ष में दोनों ही एकादशियो का भिन्न-भिन्न महत्व हमारे पुराणों एवं धर्मग्रंथों में बताया गया है।

देवशयनी एकादशी व्रत के नियम

भक्त एकादशी का व्रत करते है उनको दशमी से लेकर द्वादशी तक कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करना चाहिए।

  • शुध्द एवं सात्विक भोजन करें।
  • चावल,लहसुन,प्याज ,मांस ,मदिरा,मसूर दाल,कटहल की सब्जी न खाएं।-दशमी के दिन पराए अन्न अर्थात दूसरे के घर का भोजन नहीं करना चाहिए।-शहद नहीं खाना चाहिए।
  • ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना चाहिए।
  • सुबह जल्दी उठकर पूजा अर्चना कर एकादशी व्रत का संकल्प धारण करें।

देवशयनी एकादशी व्रत में क्या करें?

पदम् पुराण के उत्तर खंड के अनुसार,

  • सूर्य भगवान को अर्घ्य दे।
  • माता पिता को प्रणाम करे तुलसी जी का पूजन करें।
  • गोमाता का पूजन करें।
  • यह व्रत निर्जला/निराहार या फलाहार करके करें।
  • सर्वोत्तम फलाहार गाय का दूध व फल होते है।
  • एकादशी के दिन झूठ न बोले, क्रोध न करे और लड़ाई एवं झगड़े से दूरी बनाए।
  • दाड़ी कटिंग व सेविंग न करे।
  • एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें।
  • शुभ मुहूर्त में एकादशी के अगले दिन ही व्रत का पारणा करें।