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बिना नई जनगणना और व्यापक सार्वजनिक चर्चा के संशोधन लाना अनुचित : गुंडूराव

गुंडूराव ने कहा, कर्नाटक ने जिम्मेदारी के साथ जनसंख्या नियंत्रण किया है। डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसे राज्यों की राजनीतिक आवाजकमजोर न हो। प्रतिनिधित्व तय करते समय केवल जनसंख्या ही नहीं, बल्कि अन्य विकास संकेतकों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कर्नाटक की प्रमुख मांगों में 2027 की जनगणना पूरी होने तक डिलिमिटेशन को टालना, प्रतिनिधित्व तय करने में अतिरिक्त मानकों को शामिल करना और विधेयक पर आगे बढऩे से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाना शामिल है।
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बैंगलोर

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Nikhil Kumar

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Updated: 16 Apr 2026, 6:31 PM IST

कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री दिनेश गुडूराव। (File Photo)

संसद Parliament के विशेष सत्र में बुधवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 The Constitution (131st Amendment) Bill, पेश किया गया, जिसके बाद कर्नाटक Karnataka सहित दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। विधेयक को लेकर मुख्य विवाद संभावित डिलिमिटेशन (संसदीय सीटों के पुनर्निर्धारण) और उसके आधार को लेकर है।

पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं

कर्नाटक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री दिनेशगुडूराव Dinesh Gundu Rao ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिना नई जनगणना, सर्वदलीय बैठक और व्यापक सार्वजनिक चर्चा के ऐसा महत्वपूर्ण संशोधन लाना उचित नहीं है। 2021 की जनगणना नहीं हुई है और 2027 की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, ऐसे में प्रतिनिधित्व तय करने के लिए पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है।

केंद्र से मिलने वाला हिस्सा अपेक्षाकृत कम

उन्होंने कर्नाटक के स्वास्थ्य और जनसंख्या नियंत्रण के प्रदर्शन का हवाला देते हुए चिंता जताई है कि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण करने से बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को नुकसान हो सकता है। कर्नाटक का कुल प्रजनन दर (टीएफाअर) 1.7 है, जो राष्ट्रीय स्तर 2.1 से कम है। मातृ मृत्यु दर और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। कर्नाटक देश की सकल घरेलू उत्पादा (जीडीपी) में लगभग 8.7 फीसदी योगदान देता है, जबकि उसकी आबादी करीब पांच फीसदी है। इसके बावजूद केंद्र से मिलने वाला हिस्सा अपेक्षाकृत कम है।

अन्य विकास संकेतकों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए

गुंडूराव ने कहा, कर्नाटक ने जिम्मेदारी के साथ जनसंख्या नियंत्रण किया है। डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसे राज्यों की राजनीतिक आवाजकमजोर न हो। प्रतिनिधित्व तय करते समय केवल जनसंख्या ही नहीं, बल्कि अन्य विकास संकेतकों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कर्नाटक की प्रमुख मांगों में 2027 की जनगणना पूरी होने तक डिलिमिटेशन को टालना, प्रतिनिधित्व तय करने में अतिरिक्त मानकों को शामिल करना और विधेयक पर आगे बढऩे से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाना शामिल है।