गुंडूराव ने कहा, कर्नाटक ने जिम्मेदारी के साथ जनसंख्या नियंत्रण किया है। डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसे राज्यों की राजनीतिक आवाजकमजोर न हो। प्रतिनिधित्व तय करते समय केवल जनसंख्या ही नहीं, बल्कि अन्य विकास संकेतकों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कर्नाटक की प्रमुख मांगों में 2027 की जनगणना पूरी होने तक डिलिमिटेशन को टालना, प्रतिनिधित्व तय करने में अतिरिक्त मानकों को शामिल करना और विधेयक पर आगे बढऩे से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाना शामिल है।