बैंगलोर

कम्बाला पर अंतरिम रोक लगाने से उच्चतम न्यायालय का इनकार

पीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 12 मार्च की तिथि मुकर्रर की

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Feb 12, 2018
local body employees to loose job
court decision

बेंगलूरु.नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने राज्य के तटवर्ती इलाकों में हर साल होने वाले भैंसों की दौड़ कम्बाला के आयोजन पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को पशु अधिकार के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन पेटा की याचिका पर सुनवाई के दौरान अंतरिम रोक लगाने की मांग खारिज कर दी। हालांकि, पीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 12 मार्च की तिथि मुकर्रर की। पेटा की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि कम्बाला के आयोजन के बारे में राज्य की सरकार की ओर से जारी किए गए अध्यादेश की वैधता खत्म हो चुकी है और अब इसका आयोजन कानून सम्मत नहीं होगा। उच्चतम न्यायालय के कम्बाला के आयोजन पर प्रतिबंध लगाने के बाद राज्य सरकार ने केंद्रीय पशु अत्याचार निवारण कानून के प्रावधानों में बदलाव को मंजूरी दिया था। सरकार ने यह कदम तमिलनाडु के जलीकट्टू के आयोजन के लिए अध्यादेश जारी करने के बाद उठाया था। कम्बाला का आयोजन तटवर्ती कर्नाटक के साथ ही उत्तर कर्नाटक के कुछ इलाकों में नवम्बर से मार्च के बीच किया जाता है।

पिछले साल फरवरी में ही विधानमंडल ने कम्बाला विधेयक को पारित कर दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार से अनुमोदित होने के बाद राज्यपाल ने विधेयक को मंजूरी दे दी थी। इस संशोधन के कारण ही इस बार राज्य के तटवर्ती इलाकों में कम्बाला का आयोजन हुआ था। पिछले साल विधेयक पेश करते हुए पशुपालन मंत्री ए मंजु ने कहा था कि कम्बाला राज्य का पारंपरिक और सांस्कृतिक खेल है जिसमें पशुओं के साथ क्रूरता नहीं होती है। संशोधन के जरिए कम्बाला के साथ बैल दौड़, बैलगाड़ी दौड़ को भी पशु अत्याचार कानून के दायरे से बाहर किया गया था। पेटा सहित कुछ संगठनों ने कानून में संशोधन के शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी जिस पर अभी सुनवाई चल रही है।

Published on:
12 Feb 2018 07:41 pm