'ऊं नम: शिवाय' महामंत्र के साथ ही तांडव स्तोत्र, शिव पंचाक्षर स्तोत्र की चहुंओर अनुगूंज दी सुनाई
बेंगलूरु.महाशिवरात्रि पर प्रदेश भर में भगवान भोलेनाथ के मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। मंगलवार को भोर से शुरू हुए भक्ति भाव के कार्यक्रम देर रात्रि से बुधवार सुबह तक चलते रहे। शहर में बसवनगुड़ी स्थित गवी गंगाधरेश्वर मंदिर , बलेपेट के काशी विश्वेश्वरय्या मंदिर, मल्लेश्वर के काडु मल्लेश्वर मंदिर, पुराने हवाई अड्डा रोड शिव मंदिर सहित विभिन्न शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही।
शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर केजीएफ के पास कोटि लिंगेश्वर, नंजनगुड में श्रीकंठेश्वर मंदिर, चामराजनगर के एमएम हिल्स में माले महादेवेश्वर स्वामी, मैसूरु महल परिसर के त्रिनेत्रेश्वर स्वामी मंदिरों में खूब भीड़ देखी गई। 'ऊं नम: शिवाय' महामंत्र के साथ ही तांडव स्तोत्र, शिव पंचाक्षर स्तोत्र की चहुंओर अनुगूंज सुनाई दी।
नंजनगुड को दक्षिण की काशी के नाम से जाना जाता है, यहां का इतिहास शिव भक्त परशुराम और गौतम आदि ऋषियों के साथ जुड़ा है। श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि का विशेष अनुष्ठान शुरू करने से पूर्व कपिला नदी में डुबकी लगाई। दुग्ध, जल, अक्षत, पुष्प और बिल्वपत्र से शिव की आराधना दिन और रात भर चलती रही।
वहीं, मैसूरु महल पूर्वोत्तर में स्थापित त्रिनेत्रेश्वर स्वामी मंदिर में विशेष दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ी। यहां शिवलिंग को महाशिवरात्रि के अवसर पर करीब १२ वजनी स्वर्ण निर्मित मुखौटा पहनाया जाता है, जिसे देखने दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
चामुण्डी पहाड़ी में महाबल बेट्टा पर महाबलेश्वर मंदिर में शिव के जयकारे गंूजे। इस मंदिर का निर्माण करीब ९०० साल पहले हुआ था। रामानुज मार्ग पर गुरुकुल में स्थापित १०८ शिवलिंग के दर्शन को भी बड़ी संख्या में
विदेश सैलानियों ने भी किया भोले के दर्शन
मैसूरु के एक मंदिर में विदेश से आए पर्यटकों ने भी भगवान शिव के दर्शन किए। वहीं श्रीरंगपट्टण के कावेरी नदी के तट पर बोराप्पा देवस्थान में महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। अरकेरे गांव में शिवमंदिर पूजा व ब्रह्माकुमारी आश्रम में शिवलिंग की स्थापना की गई। कोडियाला के शिव मंदिर में विशेष पूजा रखी गई। पिहल्ली, हुणशगहल्ली, तडगोडि, दोड्डरहल्ली आदि गांवों से श्रद्धालुओं ने दर्शन किए ।