उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अनुपस्थिति पर फिल्म उद्योग को कड़ी चेतावनी दी है। उडुपी में रविवार को उन्होंने कहा, फिल्म उद्योग को जो कहना है कहने दीजिए, मैंने वही सच कहा, जो मैं जानता हूं। अगर वे विरोध करना चाहते हैं या लडऩा चाहते हैं, तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, वे हमारे जल अधिकारों के संघर्ष में हमारे साथ नहीं खड़े हुए।
बेंगलूरु. उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अनुपस्थिति पर फिल्म उद्योग को कड़ी चेतावनी दी है। उडुपी में रविवार को उन्होंने कहा, फिल्म उद्योग को जो कहना है कहने दीजिए, मैंने वही सच कहा, जो मैं जानता हूं। अगर वे विरोध करना चाहते हैं या लडऩा चाहते हैं, तो वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, वे हमारे जल अधिकारों के संघर्ष में हमारे साथ नहीं खड़े हुए।
मैकेदाटू परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, जब हमने पार्टी लाइन से हटकर अपनी जमीन और पानी के लिए लड़ाई लड़ी, तो वे कहां थे? मैकेदाटू यात्रा के दौरान उनमें से कोई भी नहीं आया। वे हमेशा दावा करते हैं कि वे जमीन और पानी के मुद्दों के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन जब समय आता है, तो वे भाग नहीं लेते।
फिल्म उद्योग पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने सवाल किया, कल (शनिवार को) किसका कार्यक्रम था? क्या यह मेरा कार्यक्रम था? लोग कहते हैं कि फिल्म उद्योग खत्म हो रहा है, सिनेमाघर बंद हो रहे हैं और वे अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, अगर ऐसा है, तो फिर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव किसके लिए आयोजित किया जा रहा है? अगर हम कहते हैं कि यह उद्योग के लिए है, तो कैमरामैन, पटकथा लेखक, अभिनेता और निर्देशक सहित सभी को इसमें भाग लेना चाहिए। अगर वे अपने ही कार्यक्रम में नहीं आते हैं, तो इसका क्या मतलब है?
भाजपा की आलोचना करते हुए शिवकुमार ने कहा, "आर अशोक जो चाहें कर सकते हैं, यहां तक कि जरूरत पडऩे पर सिर के बल खड़े भी हो सकते हैं। हम आईटी-बीटी और निवेशकों के शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं। क्या इसका मतलब यह है कि केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ही लाभ मिल रहा है? क्या हम गृह लक्ष्मी और गृह ज्योति योजनाएं केवल कांग्रेस समर्थकों के लिए प्रदान कर रहे हैं? भाजपा नेताओं को अपने कार्यकर्ताओं से इन गारंटी योजनाओं का लाभ न उठाने का आह्वान करना चाहिए। उन्हें खुले तौर पर घोषणा करनी चाहिए कि वे कांग्रेस द्वारा प्रदान किए गए लाभों को स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि सभी दलों के लोग इन योजनाओं का आनंद ले रहे हैं। उन्होंने निष्कर्ष निकाला, जनता स्पष्ट सोच रखती है, लेकिन कुछ नेता केवल ईर्ष्या से जल रहे हैं, क्योंकि उन्हें मौका नहीं दिया गया।
इससे पहले शिवकुमार के बयान पर आपत्ति जताते हुए विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने सिनेमा कलाकारों को धमकाने के लिए सार्वजनिक मंच का इस्तेमाल किया है।
अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, कांग्रेस द्वारा आयोजित राजनीतिक पदयात्रा में भाग लेना या न लेना कलाकारों पर छोड़ दिया गया है। कलाकारों से यह कहना कि कांग्रेस के साथ जाने पर उन्हें लाभ मिलेगा, आपके पद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
उन्होंने कहा कि कलाकार किसी की संपत्ति नहीं हैं और न ही वे कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता हैं। उन्हें किसी की भी पहचान करने या उससे दूर रहने का अधिकार है। सभी को अपना गुलाम समझने और सभी से अपनी पार्टी को सलाम करने की अपेक्षा करने की मानसिकता से बाहर आएं। कलाकारों का सम्मान करना सीखें।
पार्टी के प्रति वफादारी को लेकर सवाल पूछे जाने पर उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने साफ किया कि वह एक वफादार कांग्रेस कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा, मैंने किसी पर कोई शर्त नहीं रखी है। ऐसा करने की जरूरत भी नहीं है। मैं कार्यकर्ता हूं, पार्टी जो कहती है, मैं उसके अनुसार काम करता हूं। शर्तें रखना या ब्लैकमेल करना मेरे खून में नहीं है। शिवकुमार ने कहा, मेरी वफादारी और समर्पण पर सवाल उठाने वाला भ्रम में हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी और गांधी परिवार के प्रति उनके समर्पण पर सवाल उठाने वाला भ्रम में है। डिप्टी सीएम ने दावा किया कि पार्टी 2028 के विधानसभा चुनावों में कर्नाटक की सत्ता में वापस लौटेगी।