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आलोचना को देशद्रोह बताना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ

डॉ. मनमोहन सिंह बेंगलूरु सिटी विश्वविद्यालय Dr. Manmohan Singh, Bengaluru City University में अखिल भारतीय शिक्षा बचाओ समिति (एआइएसइसी) एवं इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में इतिहास शिक्षण के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विषय पर एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। नागरिक स्वतंत्रता लोकतंत्र की विरासत इस अवसर पर देश के जाने-माने इतिहासकारों और शिक्षाविदों ने […]

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व प्रोफेसर प्रो. आदित्य मुखर्जी

डॉ. मनमोहन सिंह बेंगलूरु सिटी विश्वविद्यालय Dr. Manmohan Singh, Bengaluru City University में अखिल भारतीय शिक्षा बचाओ समिति (एआइएसइसी) एवं इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में इतिहास शिक्षण के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विषय पर एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

नागरिक स्वतंत्रता लोकतंत्र की विरासत

इस अवसर पर देश के जाने-माने इतिहासकारों और शिक्षाविदों ने विचार व्यक्त किए। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व प्रोफेसर प्रो. आदित्य मुखर्जी ने कहा कि नागरिक स्वतंत्रता लोकतंत्र की विरासत है और आलोचना को राष्ट्र विरोधी नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने भारत की बहुलतावादी परंपरा पर प्रकाश डालते हुए राजनीतिक स्वार्थों के लिए इतिहास के दुरुपयोग के प्रति आगाह किया।

भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के पूर्व निदेशक प्रो. सौमित्र बनर्जी ने इतिहास को प्रमाण, शोध और सत्यापन पर आधारित एक वैज्ञानिक अनुशासन बताया। उन्होंने विकृत ऐतिहासिक कथाओं के बढ़ते प्रसार पर चिंता व्यक्त की।

राजनीतिक प्रभाव

प्रो. मृदुला मुखर्जी ने कहा कि राजनीतिक प्रभाव से तैयार पाठ्यपुस्तकें और पाठ्यक्रम अक्सर इतिहास की सांप्रदायिक विकृतियों को जन्म देते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अल्लमप्रभु बेट्टदुरु ने समावेशिता को बनाए रखने और समाज में विभाजन फैलाने वाली अवैज्ञानिक व अतार्किक अवधारणाओं को चुनौती देने की आवश्यकता पर जोर दिया।