बैंगलोर

दीक्षा दिवस पर सिद्धाचल धाम हुआ भक्ति मय

आचार्य का चातुर्मास सिद्धाचल धाम मेें होगादेश के अनेक प्रांतों से शामिल हुए श्रद्धालु
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Mar 27, 2021
दीक्षा दिवस पर सिद्धाचल धाम हुआ भक्ति मय
दीक्षा दिवस पर सिद्धाचल धाम हुआ भक्ति मय

बेंगलूरु. देवनहल्ली स्थित सिद्धाचल धाम में आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर का 39 वां दीक्षा दिवस शुक्रवार को श्रद्धा, उल्लास और भक्तिमय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने आचार्य का गुणगान किया। सिद्धाचल धाम में दिन भर अनेक आयोजन हुए। सुबह फागण फेरी, संयम यात्रा और अनुमोदना उत्सव का आयोजन हुआ। सुबह गिरनार टूंक में दीक्षा केवल ज्ञान निर्वाण कल्याणक जिनालयों में ध्वजारोहण का कार्यक्रम नेमिनाथ दादा के जयकारों के बीच हुआ। कार्यक्रम के दौरान आचार्य चन्द्रयश सूरीश्वर ने अपना आगामी चातुर्मास सिद्धाचल धाम में करने की घोषणा की। आगामी चातुर्मास के लिए राज्य के अनेक शहरों से विनती लेकर संघ पदाधिकारी पहुंचे थे।


सुबह 8:30 बजे गाजे बाजे के साथ फागण फेरी की यात्रा शुरू हुई। यह यात्रा जय तलेटी से शुरू होकर स्थूलभद्र सूरी स्तुति मंदिर, वर्षी तप मंदिर मोतिशा टूंक, शांतिनाथ जिनालय, आदेश्वर मंदिर, रायन पादुका मंदिर से मुख्य दादा की टूंकपहुंची। जहां आचार्य ने श्रद्धालुओं को भक्ति करवा कर श्रद्धालुओं को आदिनाथ मय बनाया। वहां से फागण फेरी घेटियाग मंदिर के दर्शन करते हुए सकल संघ, संयम यात्रा, अनुमोदना उत्सव सभा मंडप पहुंचे। यहां पर आचार्य का जयकारों के साथ स्वागत और भक्तों ने गुरू वंदन किया। आचार्य ने मंगलाचरण किया। भजन गायक नरेंद्र वाणीगोता ने हर जन्म में गुरु तेरा साथ चाहिए गुरु भक्ति गीत प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया।

आचार्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा आज का दिन मेरा नहीं जिनशासन का है। यह जिनशासन महान हैं क्योंकि पंचम काल में भी साधु-साध्वी भगवंत अपना जीवन वैराग्य में जीते हैं। उन्होंने संसारी और साधु में अंतर बताते हुए कहा कि आप भी पानी, भोजन, कपड़ा सब रखते हो और साधु संत भी पानी, भोजन कपड़े का उपयोग करते हैं। परंतु साधु-संत आत्म जागृति रखते हैं संसारी का जीवन पापों से भरा हुआ है। साधु को हर एक समय पाप का डर रहता है।

आचार्य ने कहा कि आप जीवन में पापों से डरो और पापों का प्रायश्चित इसी भव में कर लो। नहीं तो यह पाप जन्मों जन्म तक आपके साथ आएगा और और आत्मा को दुर्गति में भटका देगा। उन्होंने कहा कि 9 वर्ष की उम्र मैं मैंने वैराग्य पाया तो उसके पीछे आचार्य विजय का उपकार है, और आज यहां तक पहुंचा हूं साधु से आचार्य पद तक पहुंचाने में महती कृपा मेरे गुरुदेव स्थूलभद्र सूरी की है। बचपन में जो ज्ञान दिया, वैराग्य वासित किया। उससे ही आज कुछ बोल पाता हूं। उन्होंने कहा कि जीवन में साधु संतों की भक्ति करो कल्याण हो जाएगा, निंदा करोगे तो दुर्गति में जाना पड़ेगा। आचार्य ने कहा पुरुषार्थ के पीछे भागते हो मगर पुण्य से ही सारे कार्य होते हैं। दूध में शक्कर डालने से दूध मीठा होता है ना की चम्मच हिलाने से। चम्मच वह पुरुषार्थ है और शक्कर पुण्य है। जीवन रूपी दूध को मीठा बनाना है तो शक्कर रूपी पुण्य मिलाना होगा तभी पुण्य की वृद्धि होगी।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष प्रकाश कोठारी ने सभी का स्वागत किया और कहा कि आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर की प्रेरणा और पुरुषार्थ से आज सिद्धाचल तीर्थ इतना सुंदर और भव्य बना है। सचिव इंदरचंद बोहरा ने कहा कि आज इतना सुंदर माहौल बना है यह सब गुरुदेव की कृपा का नतीजा है। मेला उत्सव के लाभार्थी धर्मीचंद धोका ने कहा कि आज मुझे दक्षिण के पालीताणा में ऐसा सुंदर लाभ मिला मैं कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं। गौतम बंदा मूथा ने भी कृतज्ञता ज्ञापित की। आचार्य ने आगामी चातुर्मास सिद्धचल स्थूलभद्र धाम में करने की घोषणा की। आचार्य को कामली बोहराने का लाभ भंवरलाल, महेश कुुमार, प्रकाश कुमार काकरिया बिरूर वालों ने लिया। ट्रस्टी इंदरचंद बोहरा, प्रकाश कोठारी, प्रवीण भाई, पीएच शाह, मांगीलाल वेदमूथा, चम्पालाल बाफना, जयचंद, गौतम बंदामूथा, सुरेश वेदमूथा, रमण संघवी आदि उपस्थित रहे।

Published on:
27 Mar 2021 07:57 am
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