बैंगलोर

शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं : राज्यपाल गहलोत

राज्यपाल ने कहा कि भारत कभी विश्वगुरु के रूप में जाना जाता था, जहां नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात शिक्षा केंद्र थे। भारत को पुन: वैश्विक ज्ञान शक्ति बनाने के लिए युवाओं की प्रतिभा, कौशल और ऊर्जा का सही उपयोग आवश्यक है।

less than 1 minute read
Jan 18, 2026
सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्तित्व निर्माण करे, मन को मजबूत बनाए, बुद्धि का विकास करे और व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को मेंगलूरु स्थित सेंट एलॉयसियस (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग और स्कूल ऑफ लॉ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने छात्रों से जिज्ञासा, परिश्रम और ईमानदारी को अपना मंत्र बनाने का आह्वान किया।

ये भी पढ़ें

युवाओं को विवेकानंद के आदर्शों को जीवन में अपनाना चाहिए : राज्यपाल गहलोत

समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान

राज्यपाल Thawar Chand Gehlot ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान देना चाहिए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्तित्व निर्माण करे, मन को मजबूत बनाए, बुद्धि का विकास करे और व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए।

भारत कभी विश्वगुरु के रूप में जाना जाता था

राज्यपाल ने कहा कि भारत कभी विश्वगुरु के रूप में जाना जाता था, जहां नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे विश्वविख्यात शिक्षा केंद्र थे। भारत को पुन: वैश्विक ज्ञान शक्ति बनाने के लिए युवाओं की प्रतिभा, कौशल और ऊर्जा का सही उपयोग आवश्यक है।

इंजीनियरिंग शिक्षा केवल तकनीकी ज्ञान नहीं

उन्होंने इंजीनियरिंग शिक्षा पर कहा कि यह केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, समस्या समाधान और रचनात्मकता को भी बढ़ावा देती है। वहीं, स्कूल ऑफ लॉ को उन्होंने संविधान, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

कार्यक्रम में सांसद कैप्टन ब्रिजेश चौटा, प्रो-चांसलर फादर मेल्विन पिंटो, कुलपति डॉ. प्रवीन मार्टिस, रजिस्ट्रार डॉ. रोनाल्ड नाजरेथ सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Updated on:
18 Jan 2026 04:33 pm
Published on:
18 Jan 2026 04:32 pm
Also Read
View All

अगली खबर