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कर्नाटक Karnataka में पोस्टग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों Medial Seats को लेकर इस वर्ष चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। काउंसलिंग प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भी राज्य में 783 यानी 16 फीसदी मेडिकल सीटें खाली रह गई हैं। अकादमिक वर्ष 2023-24 में भी 478 सीटें खाली थीं। पिछले वर्ष 2024-25 में 3,806 सीटों में से 428 सीटें (10 फीसदी) खाली रह गई थीं, लेकिन ये सभी प्री- व पैरा-क्लिनिकल विषयों की थीं। लेकिन, इस वर्ष पहली बार क्लिनिकल और लोकप्रिय शाखाओं में भी सीटें खाली रहना चिंता का विषय बन गया है। इसे एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केइए) ने इस वर्ष 4,773 पीजी मेडिकल सीटों के लिए काउंसलिंग आयोजित की थी। इसके लिए लगभग 14,400 छात्रों ने पंजीकरण कराया, जबकि 10,000 से अधिक छात्रों ने विकल्प भरे, इसके बावजूद बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं।
प्री- और पैरा-क्लिनिकल सीटों के लिए भी बहुत कम छात्रों ने रुचि दिखाई। उपलब्ध 119 एनाटॉमी सीटों में से केवल आठ छात्रों ने ही प्रवेश लिया। फिजियोलॉजी के लिए 20 छात्रों ने, बायोकेमिस्ट्री के लिए 21 और फार्माकोलॉजी के लिए 70 छात्रों ने विकल्प चुना। वहीं पैथोलॉजी के प्रति छात्रों की अपेक्षाकृत बेहतर रुचि देखी गई, जिसमें 226 छात्रों ने इसे चुना।
विशेषज्ञों के अनुसार एक ही वर्ष में 967 नई सीटों की बढ़ोतरी, काउंसलिंग प्रक्रिया का लंबा खींचना और अधिकांश सीटों के मैनेजमेंट कोटे में होने सहित इस बार सीटें खाली रहने के पीछे कई कारण हैं। निजी कॉलेजों में फीस भी बेहद ज्यादा है। उदाहरण के तौर पर एनाटॉमी की सीट की फीस करीब 25,000 रुपए से शुरू होकर डर्मेटोलॉजी की सीट के लिए 1.3 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। वहीं अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल काउंसलिंग के सभी चरण पूरे हो चुके हैं और अब आगे की प्रक्रिया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की अनुमति पर निर्भर करेगी।
शहर के एक मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष ने बताया कि एमबीबीएस और एमडी के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की सोच अलग होती है। एमबीबीएस में किसी भी चरण में सीटें बढ़ाई जाएं, वे भर जाती हैं। लेकिन, पीजी में ऐसा नहीं होता। अनुभव के अनुसार काउंसलिंग के बीच में जो सीटें जोड़ी जाती हैं, उनमें ज्यादा छात्र रुचि नहीं दिखाते। पीजी के छात्र पहले से ही अपने करियर की दिशा तय कर लेते हैं।
जनरल मेडिसिन - 500 - 37
रेडियोडायग्नोसिस - 287 - 35
जनरल सर्जरी - 425 -11
डर्मेटोलॉजी - 196 - 15
पीडियाट्रिक्स - 362 - 25
अधिकांश खाली सीटें प्रबंधन कोटा की हैं और फीस कई छात्रों की पहुंच से बाहर है। इन सीटों की फीस पर सब्सिडी दे इन्हें सस्ता बनाना होगा। तभी सीटें भरने में मदद मिल सकती है।
-डॉ. भगवान बी. सी., कुलपति, राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज
Updated on:
13 Mar 2026 05:51 pm
Published on:
13 Mar 2026 05:49 pm
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