
कर्नाटक Karnataka सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में बताया कि राज्य में बाघ और हाथियों Tiger and Elephant की संख्या बढ़ी है, जबकि वन क्षेत्र में कमी आई है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष Human-Wildlife Conflict की घटनाएं बढऩे की आशंका भी जताई गई है। वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि 1972 में बड़ीपुर राष्ट्रीय उद्यान में केवल 12 बाघ थे, जबकि अब उनकी संख्या बढकऱ करीब 175 हो गई है। वन क्षेत्र में वृद्धि जानवरों की बढ़ती संख्या के अनुपात में नहीं हो रही है, बल्कि जंगलों का क्षेत्र घटा है और सरकार उन्हें बचाने के लिए प्रयास कर रही है।
मंत्री ने बताया कि बंडीपुर Bandipur में वन्यजीवों की कैरीइंग कैपेसिटी (धारण क्षमता) को लेकर विशेषज्ञ समिति से रिपोर्ट मंगाई जा रही है। यह जानकारी उन्होंने विपक्ष के नेता आर. अशोक के सवाल के जवाब में दी, जिसमें पूछा गया था कि सफारी पर रोक लगाने से क्या मानव-वन्यजीव संघर्ष कम हुआ है।
सरकार ने नवंबर 2025 में बड़ीपुर और नागरहोले राष्ट्रीय उद्यान Bandipur and Nagarhole National Parks में लगातार हमलों के बाद सफारी पर रोक लगा दी थी। हालांकि, पिछले महीने इस प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया गया। खंड्रे ने कहा कि सफारी बंद होने से पर्यटन और स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित हुई तथा करीब 6 से 8 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, लेकिन यह निर्णय लोगों की जान बचाने के लिए लिया गया था।
उन्होंने बताया कि बंड़ीपुर का कुल परिधि क्षेत्र 314 किमी है, जिसमें से करीब 100 किमी क्षेत्र मानव-वन्यजीव संघर्ष का जोन है। यहां 25 एंटी-पोचिंग कैंप स्थापित किए गए हैं और चौबीसों घंटे गश्त की जा रही है। साथ ही कमांड सेंटर, ड्रोन कैमरे और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
मंत्री ने बताया कि हाथियों के हमले बढऩे के कई कारण हैं, जिनमें हाथियों की बढ़ती संख्या और विकास कार्यों जैसे एक्सप्रेसवे के कारण हाथी कॉरिडोर का खंडित होना शामिल है। सरकार 201 करोड़ रुपए की लागत से 116 किमी रेलवे बैरिकेड लगा रही है। इसके अलावा टेंटेकल फेंसिंग, हाथी टास्क फोर्स और तेंदुआ टास्क फोर्स जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
Updated on:
13 Mar 2026 07:02 pm
Published on:
13 Mar 2026 07:01 pm
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