पिछली गणना में राज्य में लगभग 563 बाघ पाए गए थे और बाघों की संख्या के मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर था। प्रोजेक्ट टाइगर के निदेशक रमेश कुमार को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है और वही पूरी गणना प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने बताया कि बताया कि कर्नाटक में बाघों की संख्या Tiger population बढऩे के आसार के सभी वन क्षेत्रों में सोमवार से बाघों और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों की गणना प्रक्रिया शुरू हो गई है।
पिछली गणना में राज्य में लगभग 563 बाघ पाए गए थे और बाघों की संख्या के मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर था। प्रोजेक्ट टाइगर के निदेशक रमेश कुमार को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है और वही पूरी गणना प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। उन्हें प्रत्येक क्षेत्र में बाघों व अन्य मांसाहारी जीवों की संख्या, शाकाहारी जीवों की आबादी, शिकार की उपलब्धता और वनों की वहन क्षमता का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पहले दो चरणों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तीसरे चरण में, उपयुक्त स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे। पांचों बाघ अभयारण्यों में कुल 2,230 कैमरा ट्रैप उपलब्ध हैं और सर्वेक्षण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। नागरहोले में 600, बंडीपुर में 550, बीआरटी में 300, भद्रा में 330 और काली बाघ अभयारण्य में 450 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि बाघ अभयारण्यों के बाहर भी कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं। सर्वेक्षण पूरा कर चुके अभयारण्य अपने कैमरे पास के वन्यजीव अभयारण्यों को उपलब्ध कराएंगे। बंडीपुर से कावेरी वन्यजीव अभयारण्य, बीआरटी से एम.एम. हिल्स और नागरहोले से मडिकेरी तथा मैसूरु क्षेत्रीय वन मंडल को कैमरे दिए जाएंगे। मानव बस्तियों की ओर बाघों की बढ़ती आवाजाही पर चिंता जताते हुए मंत्री ने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि राज्य में बाघों की संख्या बढ़ी है, हालांकि वास्तविक आंकड़े गणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।