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कर्नाटक में सोमवार से आठ दिवसीय राष्ट्रीय बाघ गणना अभियान National Tiger Census Campaign की शुरुआत हो गई। इस व्यापक अभ्यास में वन विभाग के लगभग 300 कर्मी और पोन्नमपेटे फॉरेस्ट्री कॉलेज के 30 छात्र भाग ले रहे हैं। बाघ संरक्षण की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य की संरक्षण नीतियों को वैज्ञानिक आधार मिल सकेगा।
राष्ट्रीय बाघ गणना प्रत्येक चार वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य देश में बाघों की संख्या का आकलन करना, उनके प्राकृतिक आवासों की स्थिति का मूल्यांकन करना तथा शिकार प्रजातियों की उपलब्धता का अध्ययन करना है। यह अभियान केंद्र सरकार के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मार्गदर्शन में कर्नाटक वन विभाग के सहयोग से पूरे राज्य में एक साथ चलाया जा रहा है। इसमें बन्नेरघट्टा, भद्रा, बीआरटी टाइगर रिजर्व, बंडीपुर, नागरहोले और कुद्रेमुख जैसे प्रमुख वन क्षेत्र शामिल हैं।गणनाकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण
अभियान में शामिल सभी कर्मियों को अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस बार पारंपरिक मैनुअल डाटा शीट के स्थान पर एम-स्टेप्स इकोलॉजिकल मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।
पहले चरण में गणना दल मांसाहारी और बड़े शाकाहारी वन्यजीवों, जैसे हाथी और गौर, की उपस्थिति के संकेतों की पहचान करेंगे। इसके तहत पगचिन्ह, मल, गोबर, पेड़ों पर खरोंच के निशान और अन्य गतिविधि संकेतों का अध्ययन किया जाएगा। भालू, हाथी, सांभर और चित्तीदार हिरण जैसे जानवरों के गोबर के नमूने एकत्र करने के लिए विशेष किट उपलब्ध कराई गई हैं। प्रत्येक गणनाकर्मी प्रतिदिन न्यूनतम पांच किलोमीटर पैदल सर्वेक्षण करेगा। सर्वेक्षण के लिए वन क्षेत्रों में कुल 496 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।
दूसरे चरण में विभाग द्वारा विकसित लाइन ट्रांसेक्ट्स पर पैदल गश्त के माध्यम से वन्यजीव आवासों की निगरानी की जाएगी। पार्क क्षेत्र में कुल 91 बीट्स हैं, जिनमें व्यवस्थित अवलोकन और डाटा संग्रह के लिए 106 लाइन ट्रांसेक्ट्स निर्धारित किए गए हैं।
Published on:
06 Jan 2026 07:20 pm
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