बैंगलोर

सिर्फ कांग्रेस का शो बन कर रह गया टीपू जयंती समारोह

कार्यक्रम में दिखी गठबंधन के मतभेदों की परछाई
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Updated: 11 Nov 2018, 7:50 PM IST
tipu jayanti celebration
सिर्फ कांग्रेस का शो बन कर रह गया टीपू जयंती समारोह

बेंगलूरु. टीपू जयंती के आयोजन के मसले पर सत्तारुढ़ गठबंधन के दोनों घटकों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए। कांग्रेस और जद-एस के बीच पर्दे के पीछे इस मसले पर चल रही खींचतान के कारण प्रमुख नेता मुख्य समारोह से दूर रहे। हालांकि, लगातार चौथे वर्ष टीपू जयंती के आयोजन को गठबंधन सरकार का फैसला बताया जा रहा था और दोनों दलों के नेता अंतिम क्षणों तक मतभेद की चर्चाओं को खारिज करते रहे लेकिन इसकी परछाई साफ तौर पर कार्यक्रम में दिखी।
सरकार में भागीदार जद-एस की ओर से मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी अथवा पार्टी के किसी अन्य मंत्री अथवा नेता के उपस्थित नहीं होने के कारण राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम सिर्फ कांग्रेस का शो बन कर रह गया। हालांकि, जद-एस नेताओं ने जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं- एच डी रेवण्णा ने हासन और जी टी देवेगौड़ा ने मैसूरु में कार्यक्रम में भाग लिया।
कुमारस्वामी ने अपनी सेहत का हवाला देकर कार्यक्रम में भाग लेने में असमर्थता जता दी लेकिन गठबंधन के लिए असहज स्थिति गृह विभाग का दायित्व संभालने वाले उपमुख्यमंत्री डॉ जी परमेश्वर की अनुपस्थिति के कारण उत्पन्न हो गई। बाकी किसी बड़े नेता के कार्यक्रम में नहीं पहुंचने के कारण आयोजकों के पास संकट था कि उद्घाटन कौन करे।
सूत्रों का कहना है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं को बुलाने की कोशिश की गई लेकिन वे ऐन वक्त पर आने को राजी नहीं हुए। ऐसे में फिर कांग्रेस के 'संकटमोचकÓ डी के शिवकुमार ही सहारा बने। शिवकुमार बल्लारी जिले के प्रभारी मंत्री हैं लेकिन वे वहां आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के बजाय राज्य के मुख्य समारोह में पहुंच गए। शिवकुमार को कार्यक्रम में पहुंच कर कई लोग अचंभित हो गए क्योंकि उनका नाम आमंत्रण पत्र में अतिथि के तौर पर शामिल नहीं था। बताया जाता है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर शिवकुमार कार्यक्रम में पहुंचे थे। शिवकुमार के साथ ही मंत्री जमीर अहमद ही पूरे कार्यक्रम मेंं छाए रहे।
राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि मुख्यमंत्री पद के आकांक्षी शिवकुमार को इस कार्यक्रम से अपनी दावेदारी और मजबूत करने का मौका मिल गया। शिवकुमार व जमीर, दोनों ही अपने राजनीतिक लक्ष्यों को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय के समर्थन का दावा करते रहे हैं।
गौरतलब है कि सिद्धरामय्या के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार ने 2015 में टीपू जंयती का आयोजन पहली बार किया था। शुरू से ही भाजपा और अन्य संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उस साल मडिकेरी जिले में टीपू जयंती के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी। इस साल मई में कांग्रेस और जद-एस गठबंधन की सरकार बनने के बाद टीपू जयंती के आयोजन को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी लेकिन कुमारस्वामी ने इसके आयोजन को मंजूरी दे दी थी।

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11 Nov 2018, 7:50 PM IST
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