बैंगलोर

ज्ञान सृजन, कौशल विकास, नवाचार के केंद्र के रूप में कार्य करें विवि

भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और क्वांटम कंप्यूटिंग द्वारा संचालित एक और औद्योगिक क्रांति का गवाह बन रहा है।
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Updated: 25 Mar 2025, 6:56 PM IST
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मुख्य सचिव शालिनी रजनीश ने कहा कि भविष्य कुछ ऐसा नहीं है जिसकी हम भविष्यवाणी करते हैं। यह कुछ ऐसा है जिसे हम बनाते हैं। साथ मिलकर हम एक ऐसा भविष्य बना सकते हैं जो सभी के लिए अधिक स्मार्ट, अधिक टिकाऊ और अधिक न्यायसंगत हो। चूंकि दुनिया डिजिटल क्रांति से गुजर रही है, इसलिए विश्वविद्यालयों को ज्ञान सृजन, कौशल विकास और नवाचार के केंद्र के रूप में कार्य करना चाहिए।

वे जेएसएस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 7वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने प्रौद्योगिकी को भय के साथ नहीं बल्कि दूरदर्शिता के साथ अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों को नवाचार और मानवता के बीच की खाई को पाटने के लिए बदलाव लाने वाले बनने की सलाह दी।

विश्वविद्यालयों से प्रौद्योगिकी इनक्यूबेशन केंद्र और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने का आग्रह करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि विश्वविद्यालय के नेतृत्व वाली स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र समय की मांग है। भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और क्वांटम कंप्यूटिंग द्वारा संचालित एक और औद्योगिक क्रांति का गवाह बन रहा है। अकेले एआइ से वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगभग 19.9 ट्रिलियन डॉलर का योगदान होने की उम्मीद है, जिससे उत्पादकता में 40 फीसदी की वृद्धि होगी। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें अकेले एआइ सकल घरेलू उत्पाद में 500 बिलियन डॉलर जोड़ देगा।

सुत्तूर मठ के शिवरात्रि देशीकेंद्र स्वामी ने दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की। मैसूरु के 1,678 छात्रों ने दीक्षांत समारोह में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इस अवसर पर छात्रों को उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए 148 रैंक और 64 पदक प्रदान किए गए।

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25 Mar 2025, 6:56 PM IST
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