आशा वर्कर्स यूनियन Asha Workers Union ने गुरुवार को राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। यह अगस्त 2025 के बाद उनकी तीसरी हड़ताल होगी। दरअसल, लगभग 42,000 आशा कार्यकर्ता सरकार की ओर से घोषित 10,000 रुपए मासिक मानदेय के लागू न होने से नाराज हैं। इसके विरोध में लंबे समय से उनका आंदोलन जारी है। […]
आशा वर्कर्स यूनियन Asha Workers Union ने गुरुवार को राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। यह अगस्त 2025 के बाद उनकी तीसरी हड़ताल होगी। दरअसल, लगभग 42,000 आशा कार्यकर्ता सरकार की ओर से घोषित 10,000 रुपए मासिक मानदेय के लागू न होने से नाराज हैं। इसके विरोध में लंबे समय से उनका आंदोलन जारी है। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने जनवरी 2025 में इस मानदेय की घोषणा की थी, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद यह लागू नहीं हो सका है।
आशा वर्कर्स यूनियन ने मानदेय बढ़ाकर 15,000 रुपए करने और शहरी आशा कार्यकर्ताओं के लिए अतिरिक्त 2,000 रुपए देने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि महंगाई बढऩे और काम का बोझ बढऩे के कारण वर्तमान मानदेय अपर्याप्त है।यूनियन नेताओं के अनुसार, सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हुई है, लेकिन अब तक उनके आर्थिक और कार्य स्थितियों में सुधार को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
आशा वर्कर्स यूनियन की राज्य उपाध्यक्ष रमा टी.सी. ने कहा कि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। हाल के दिनों में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य आयुक्त के साथ कई बैठकें हुईं, लेकिन इन प्रयासों का कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
आशा यूनियन ने राज्य बजट Karnataka Budget से पहले सरकार को उसके पूर्व आश्वासन की भी याद दिलाई, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाने की बात कही गई थी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें आगामी बजट में इस वादे की झलक दिखने की उम्मीद है, जबकि घोषित मानदेय वृद्धि को अब तक अधिसूचित नहीं किया गया है।