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पानी की कमी वाले इलाकों में लगाए जाएंगे ‘मिनी टैंक’

-गर्मियों में जल संकट से निपटने के लिए जल बोर्ड पूरी तरह तैयार गर्मियों की दस्तक के साथ ही बेंगलूरु जलापूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड Bangalore Water Supply and Sewerage Board (बीडब्लूएसएसबी) ने शहर में संभावित जल संकट से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। पानी की कमी वाले इलाकों में मिनी टैंक लगाए […]

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पानी की कमी

पानी की बढ़ती मांग और संभावित कमी की चुनौती से निपटने के लिए बोर्ड पूरी तरह तैयार।

-गर्मियों में जल संकट से निपटने के लिए जल बोर्ड पूरी तरह तैयार

गर्मियों की दस्तक के साथ ही बेंगलूरु जलापूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड Bangalore Water Supply and Sewerage Board (बीडब्लूएसएसबी) ने शहर में संभावित जल संकट से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। पानी की कमी वाले इलाकों में मिनी टैंक लगाए जाएंगे।

बोर्ड के चेयरमैन डॉ. वी. राम प्रसाद मनोहर ने कहा कि पानी की बढ़ती मांग और संभावित कमी की चुनौती से निपटने के लिए बोर्ड पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बोर्ड मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक में गर्मियों के दौरान जल आपूर्ति प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की।

पानी की कमी वाले इलाकों की पहचान

बैठक के बाद उन्होंने बताया कि बोर्ड ने पहले ही शहर Bengaluru के उच्च घनत्व वाले और पानी की कमी water shortage से प्रभावित संभावित इलाकों की पहचान कर ली है। इन क्षेत्रों में लोगों को नि:शुल्क पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मिनी वॉटर टैंक लगाए जाएंगे।

बोर्ड के टैंकरों को प्राथमिकता

उन्होंने टैंकों को भरने की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बोर्ड के अपने टैंकरों और संचारी कावेरी मोबाइल टैंकरों को प्राथमिकता दी जाए। निजी टैंकरों का उपयोग केवल अत्यंत आवश्यक स्थिति में अंतिम विकल्प के रूप में ही किया जाए।

अधिकारी फील्ड में रहेंगे सक्रिय

गर्मियों summer के जल प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेयरमैन ने सभी मुख्य अभियंताओं, सहायक कार्यपालक अभियंताओं (एईई) और जल निरीक्षकों को कार्यालयों से बाहर निकलकर फील्ड में सक्रिय रहने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा करें, जमीनी हालात का आकलन करें और यह सुनिश्चित करें कि चिन्हित इलाकों तक जल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की चूक न हो।

कावेरी पांचवें चरण में 50 प्रतिशत से अधिक कवरेज

कावेरी पांचवें चरण परियोजना के तहत 50 प्रतिशत से अधिक कवरेज हासिल होने और वर्ष 2025 में अच्छे मानसून के चलते वर्ष 2026 की गर्मियों में बेंगलूरु में पीने के पानी की स्थिति अपेक्षाकृत आरामदायक रहने की उम्मीद है। इससे शहर के बाहरी इलाकों और हाल ही में जोड़े गए गांवों में जल संकट काफी हद तक कम हुआ है।

डॉ. मनोहर ने बताया कि वर्ष 2025 में अच्छी बारिश होने से कावेरी बेसिन के जलाशयों में पर्याप्त जल संग्रह है, जिससे गर्मियों के महीनों में शहर को पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से की जा सकेगी।

1.75 लाख से अधिक कनेक्शन दिए गए

अक्टूबर 2024 में शुरू की गई कावेरी पांचवें चरण की परियोजना के तहत अब तक 1.75 लाख से अधिक कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जिससे 50 प्रतिशत से ज्यादा कवरेज हासिल हो गया है। इस चरण में 400 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि कुल लक्ष्य तीन लाख से अधिक कनेक्शन और 775 एमएलडी जल आपूर्ति का है।

इससे शहर के बाहरी इलाकों और 110 गांवों में पीने के पानी की समस्या काफी हद तक कम हुई है, जो पहले बोरवेल और टैंकरों पर निर्भर थे।

टैंकरों की मांग में आई कमी

डॉ. मनोहर ने कहा कि पांचवें चरण के तहत नए कनेक्शन तेजी से दिए जा रहे हैं और इससे उन इलाकों में भी राहत मिली है, जो वर्ष 2024 जैसे सूखे साल में सबसे ज्यादा जल संकट से जूझ रहे थे। कई क्षेत्रों में पानी के टैंकरों की मांग में कमी देखी जा रही है।

हालांकि, कुछ इलाके और अपार्टमेंट परिसर अब भी बोरवेल और टैंकरों पर निर्भर हैं। वर्तमान में बाजार में 12 हजार लीटर पानी के एक टैंकर की कीमत करीब 1,200 रुपए है।

भूजल स्तर और जल संरक्षण पर फोकस

गर्मियों की तैयारी के तहत बोर्ड ने शहर के भूजल स्तर groundwater level का अध्ययन कराने के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) को जिम्मेदारी सौंपी है। डॉ. मनोहर ने बताया कि इस अध्ययन की रिपोर्ट जल्द मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में शहर की 40 झीलों को शोधित पानी से भरा गया है, जिससे भूजल स्तर बढ़ने की संभावना है।

इस बीच, बोर्ड ने जल संरक्षण के उन उपायों को भी जारी रखा है, जिन्हें वर्ष 2024 की भीषण गर्मियों के दौरान अपनाया गया था। सूत्रों के अनुसार अब तक 15 लाख से अधिक सार्वजनिक नलों में एरेटर लगाए जा चुके हैं, जिससे हर साल करीब 40 करोड़ रुपए मूल्य का पानी बचाया जा रहा है।