बैंगलोर

सुखोई के साथ ब्रह्मोस के इंटीग्रेशन में एनएएल की रही अहम भूमिका

वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई से सुपरसोनिक कू्रज मिसाइल ब्रह्मोस दागने का सफल परीक्षण

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Dec 30, 2017

बेंगलूरु. वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई से सुपरसोनिक कू्रज मिसाइल ब्रह्मोस दागने का सफल परीक्षण ऐतिहासिक रहा मगर कम ही लोग जानते हैं कि इस सफलता में देश की एक अग्रणी प्रयोगशाला ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रयोगशाला नेशनल एयरोनॉटिक्स लेबोरेटरीज (एनएएल) है।


वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएस आईआर) की बेंगलूरु स्थित इस अग्रणी प्रयोगशाला ने वर्ष 2013-14 के दौरान सुखोई में ब्रह्मोस के इंटीग्रेशन से पहले बेहद निर्णायक विंड टनल टेस्ट शृंखला को अंजाम दिया। यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि इस विंड टनल टेस्ट शृंखला को पूरा करने के लिए रूस ने एक तरह से आसमान से तारे लाने की मांग कर दी थी। रूस ने इस टेस्ट के लिए जो कोटेशन दिया, उसमें 1300 करोड़ रुपए से अधिक की मांग की गई थी। ऊपर से वे तकनीकी हस्तांतरण के लिए भी तैयार नहीं थे। सैन्य सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि परीक्षणों की इस शृंखला को पूरा करने के लिए रूस ने इतनी बड़ी रकम मांगी थी।


दरअसल, यह परीक्षण रूस के लिए भी नया था क्योंकि भारत विश्व का पहला ऐसा देश है जिसने एक युद्धक विमान में कू्रज मिसाइल का इंटीग्रेशन किया है। तब भारतीय टीम जिसमें ब्रह्मोस, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारतीय वायुसेना के सदस्य थे एनएएल का रुख किए। राष्ट्रीय सैन्य एवं अंतरिक्ष अभियानों के लिए विंड टनल टेस्ट को अंजाम देने वाली प्रयोगशाला एनएएल ने उस चुनौती को स्वीकार किया और लगभग 120 गुणा कम लागत में विंड टनल टेस्ट की सीरिज पूरी की।


एनएएल के लिए भी अपने ङ्क्षवड टनल में सुखोई युद्धक जैसे एक बड़े विमान से ड्रॉप टेस्ट (बम आदि गिराने) का यह पहला अनुभव था। एनएएल के 1.5 मीटर लो स्पीड विंड टनल में मैक 0.3 की न्यूनतम गति पर भी वैज्ञानिकों ने इस महत्वपूर्ण परीक्षण को पूरा किया। इसके लिए एनएएल के नेशनल ट्राइसोनिक एयरोडायनेमिक केंद्र में सुखोई-30 एमकेआई युद्धक का एक मॉडल रिकॉर्ड समय में डिजाइन और तैयार किया गया। ट्राइसोनिक विंड टनल में सब सोनिक (ध्वनि की गति से कम), ट्रांसोनिक (ध्वनि की गति या उसका 0.8 गुणा) और सुपरसोनिक (ध्वनि की गति से 1.2 से 5 गुणा अधिक) स्पीड रेंज में उड़ान परीक्षण संभव है।


रूसी वैाानिक भी चौंके
सुखोई में ब्रह्मोस के इंटीग्रेशन से पहले बह्मोस सेपरेशन ट्रायल की मंजूरी आवश्यक थी जो इस परीक्षण के बाद मिल गई। जब 22 नवंबर को विंग कमांडर प्रशांत नायर ने कलाइकुंडा वायुसेना केंद्र से सुखोई में उड़ान भरी और बह्मोस से लक्ष्य भेद कर लौटे तो उन आंकड़ों का मिलान एनएएल के परीक्षण से किया गया। एनएएल के परीक्षण से मिले आंकड़े इतने सटीक निकले कि रूसी वैज्ञानिक भी चौंक गए।


बेहद जटिल परीक्षण प्रक्रिया
एनएएल में परीक्षण से ब्रह्मोस दागने के समय विमान की उड़ान गति और विमान के विचलन कोण को समायोजित करने के लिए अहम आंकड़े मिले। इस दौरान विमान के सामने और पिछले हिस्से का कोणीय झुकाव कितना होना चाहिए इसके बारे में भी सटीक आंकड़े मिल गए। एनएएल ने लो स्पीड और हाई स्पीड विंड टनल टेस्ट के लिए सुखोई और ब्रह्मोस मिसाइल के उचित मॉडल का उपयोग किया।

एयरोडायनेमिक लोड (वायुगतिकी भार) का निर्धारण 2 फीट विंड टनल और फिर 4 फीट विंड टनल में परीक्षणों के बाद किया गया। इसमें 0.55 मैक से 1.2 मैक की गति पर हमले के लिए विभिन्न कोणों का निर्धारण किया गया। भारत में पहली बार ऐसा हुआ जब एनएएल के एक्सपेरिमेंटल एयरोडायनेमिक्स डिविजन में बेहद जटिल ‘ड्रॉप टेस्ट’ का परीक्षण किया गया। इस परीक्षण के दौरान विंड टनल में मिसाइल को विमान से दागा जाता है और इस दौरान विमान की ऊंचाई, गति, मिसाइल दागने के कोण, उसका पथ आदि का विश्लेषण कर उसका निर्धारण होता है।

Published on:
30 Dec 2017 11:13 pm
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