बैंगलोर

गुरु के बिना जीवन का हर ज्ञान अधूरा

पुखराज महाराज ने कहा कि मानव जन्म में गुरु होना ही चाहिए

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गुरु के बिना जीवन का हर ज्ञान अधूरा

बेंगलूरु. मातेश्वरी भक्त मंडल एवं श्रीकृष्णा गो सेवा आश्रम गौशाला के संयुक्त तत्त्वावधान में कोतनुर स्थित गौशाला में शुक्रवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि महंत रामाज्ञानदास, संत गुलशनगिरि जूनागढ़, पुखराज महाराज के सान्निध्य में गायक जुगलकिशोर ने गणेश वंदना से जागरण शुरू किया।

उन्होंने गुरु बिना ज्ञान अधूरा एवं अन्य सुंदर भजनों से गुरु महिमा का बखान किया। कलाकार राजूभाई पटेल, कैलाश सेन, रमेश राजस्थानी ने प्रस्तुति दी। पुखराज महाराज ने कहा कि मानव जन्म में गुरु होना ही चाहिए। मानव को प्रथम गुरु माता-पिता के बाद गुरु से ही शिक्षा मिलती है। रूपाराम कुमावत, लालसिंह राजपूत, मोहनलाल सीरवी, बाबूलाल जेसी रोड ग्रुप, मनोहर सीरवी एवं समस्त मातेश्वरी भक्त मंडल एवं समाज बंधु उपस्थित थे।

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बिन गुरु जीवन बिना इंजन की गाड़ी जैसा
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चामराजपेट में साध्वी अर्पिता ने कहा कि हर साल चातुर्मास आता है पर हम हर साल आत्मा के लिए क्या करते हैं, ये चिंतन करना है। उन्होंने कहा कि जैसे सीजन के दिनों में हर व्यापारी की नजर पैसों पर रहती है, वैसे ही चातुर्मास में हर धर्मात्मा की नजर धार्मिक गतिविधियों पर रहती है। गुरु पूर्णिमा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने सर्वप्रथम माता-पिता, उसके बाद आध्यात्मिक गुरु और व्यावहारिक ज्ञान देने वाले सभी गुरुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गुरु बिना जीवन बिना इंजन की गाड़ी जैसा है।


शिष्य को धर्म की राह पर लाते हैं गुरु
बेंगलूरु. विजयनगर स्थानक में साध्वी मणिप्रभा ने कहा कि आज का सुप्रभात एक नया सवेरा लेकर उदित हुआ। आज के दिन जनमानस कितने दिनों से इंतजार कर रहा था। आज का यह पावन दिन गुरु पूनम के नाम से जाना जाता है। अर्थात गुरु स्मरण का दिन। उन्होंने कहा कि गुरु शिष्य को धर्म की राह पर लाकर अकेला बीच मझधार में नहीं छोड़ता, वह तो उसे मोक्ष मंजिल तक पहुंचा कर ही छोड़ता है। आज गुरु पूर्णिमा का यह पावन अवसर चातुर्मास लेकर आया है।

सभी को धर्म ध्यान करने की प्रेरणा देता है कि व्यक्ति अपने जीवन में कुछ धर्म करें। जिस प्रकार वर्षा ऋतु में वर्षा के बिना पेड़ पौधे, खेत-खलिहान सूख जाते हैं, जब वर्षा होती है तो वह प्यासी धरती अपनी प्यास बुझा कर अन्न पैदा करती है-ठीक उसी प्रकार मानव इन चार माह में विशेष प्रकार का धर्म करके अपनी आत्मा को पल्लवित और पुष्पपित करता और मोक्ष मंजिल को प्राप्त कर लेता है।

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Published on:
28 Jul 2018 06:23 pm
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