
प्रेरणा की मिसाल शिक्षक मुकेश भट्ट
बनकोड़ा
कहते हैं कि यदि इंसान के इरादों में सच्चाई और सोच में समाज कल्याण का भाव हो, तो वह बदलाव की नई क्रांति खड़ी कर सकता है। कुछ ऐसी ही अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं डूंगरपुर जिले के भासौर गांव के शिक्षक मुकेश भट्ट। राउप्रावि सुरेला के शिक्षक भट्ट ने संस्कारों को जीवन का मूलमंत्र बनाया। आज शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके द्वारा स्थापित किए गए आयामों की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। शिक्षक के रूप में भट्ट का जीवन केवल चार दीवारों और पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने स्कूल परिसर में ऐसा शैक्षिक और सह-शैक्षिक वातावरण निर्मित किया, जिससे बच्चे न केवल शैक्षणिक दक्षता में अव्वल आए, बल्कि उनके भीतर नैतिक चरित्र और संस्कारों का बीजारोपण भी हुआ। शिक्षा के साथ-साथ उनका समर्पण धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की ओर भी बढ़ा। भासौर स्थित प्राचीन स्वयंभू नीलकंठ महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प उनके जीवन का एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। उनकी प्रेरणा से गांव के युवा धार्मिक और सामाजिक कार्यों से जुड़े। आज भासौर के इस शिवालय में युवाओं की एक ऊर्जावान टीम रोजाना सक्रिय रहकर मंदिर की व्यवस्थाओं को संभालती है। भामाशाह खुद आगे आए, जिसके परिणामस्वरूप अब हर सोमवार को मंदिर में हवन, भव्य श्रृंगार और महाप्रसाद की अटूट व्यवस्था होती है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मुकेश केवल परंपराओं के संवाहक ही नहीं, बल्कि एक पर्यावरण प्रेमी भी हैं। उन्होंने शिवालय परिसर के चारों ओर सघन पौधारोपण करवाकर समाज को यह संदेश दिया कि प्रकृति की सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। आज मंदिर परिसर की हरियाली वहां आने वाले हर श्रद्धालु को आत्मीय सुकून देती है। इसके अलावा धार्मिक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी वे समाज में संदेश देते हैं। सकारात्मक सोच, व्यक्तिगत संपर्क और निरंतर प्रेरणा से उन्होंने दर्जनों युवाओं का ऐसा मार्गदर्शन किया कि उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल गई। आज उनके सही मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि क्षेत्र के काफी युवा मेहनत कर सरकारी नौकरियों में चयनित हो रहे हैं ।