
बांसवाड़ा। दशहरा मेले के टेंडर विवाद में गुरुवार को फिर नया मोड़ आया। टेंडर फाइनल होने के बाद फर्म का प्रोपराइटर राशि जमा कराने ही नहीं पहुंचा। अब नगर परिषद के अधिकारी दूसरे नंबर पर अधिकतम बोली लगाने वाली फर्मों की हाथा-जोड़ी में लगे हैं और मेले का टेंडर लेने का अनुरोध कर रहे हैं। उधर, परिषद की मजबूरी का फायदा उठा दूसरे बोलीदाता भी अपनी शर्ते मनवाने में लगे है। देर शाम तक भी टेंडर पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया।
बांसवाड़ा में 15 दिवसीय दशहरा मेला नवरात्र के पहले दिन से शुरू होता है। इसमें केवल दो दिन बचे हैं। मंगलवार से शुरू टेंडर प्रक्रिया तीन दिन में भी पूरी नहीं हुई। पहले दिन स्थानीय बोलीदाताओं को टेंडर से बाहर करने पर देर रात तक हंगामा हुआ। दूसरे दिन बुधवार को भी सफल बोलीदाताओं को बुलाए बिना ही अधिकारियों ने सूरत की फर्म वन्दे मातरम एम्यूजमेंट को 71 लाख 11 हजार में टेंडर दे दिया, लेकिन फर्म पैसा जमा कराने आई ही नहीं।
टेंडर प्रक्रिया फेल होते देख अधिकारियों ने गुरुवार को दो अन्य बोलीदाताओं को बुलाया। मंगलवार को सबसे अधिक बोली लगाने वाली फर्म अजमेर की फर्म को बोली बढ़ाकर लेने की अपील की, लेकिन बोलीदाता ने उच्चतम बोली में टेंडर लेने से मना कर दिया।
बोली में नौ फर्म शामिल हुई, लेकिन परिषद ने 6 फर्म को अलग-अलग कारणों से प्रक्रिया से बाहर कर दिया। बाकी तीन फर्म ही बोली में शामिल हुई। बोली भी अधिक ऊंची नहीं गई। टेंडर फाइनल नहीं होने से नगर परिषद के नए बोर्ड की किरकिरी हो रही है।
| वर्ष | अंतिम बोली की राशि (रुपए) |
|---|---|
| 2026 | 71,11,000 |
| 2025 | 84,25,000 |
| 2024 | 84,10,000 |
| 2023 | 64,00,000 |
| 2022 | 48,00,000 |
मुझे और दूसरी फर्म को बोली के लिए बुलाया, लेकिन हम बोली अधिक लगाने की स्थिति में नहीं हैं। मेले में समय कम रह गया है। अधिकारियों से बातचीत चल रही है।
-जावेद आलम, दूसरे नम्बर के बोलीदाता
मेले के टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। टेंडर कम कीमतों में जाने का सवाल ही नहीं है। मेला समयबद्ध तरीके से होकर रहेगा।
-प्रकाश डूडी, आयुक्त, नगर परिषद