
मेतवाला पंचायत के वार्ड एक धुलजी का गडा में एकत्र होकर निर्विरोध वार्डपंच बनाते ग्रामीण। फोटो: पत्रिका
बांसवाड़ा/पालोदा। चुनावी राजनीति में जहां सरपंच से लेकर वार्ड मेम्बर तक के चुनाव में एक-एक मत के लिए सियासी दाव-पेंच चलते हैं, वहीं समीपवर्ती मेतवाला पंचायत का वार्ड संख्या एक धुलजी का गड़ा इसकी अलग मिसाल पेश कर रहा है। पंचायत के पहले चुनाव से अब तक यहां वार्ड मेम्बर का चुनाव निर्विरोध होता आया है। वर्ष 1960 से चली आ रही इस परंपरा को कायम रखते हुए सर्व समाज की बैठक में आपसी सहमति से स्थानीय निवासी राजेन्द्र प्रतिहार को वार्ड पंच घोषित कर दिया गया है। परिपाटी नहीं टूटी तो उनका निर्विरोध निर्वाचन तय है।
ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव से आपसी मनमुटाव और गुटबाजी बढ़ती है, जबकि सहमति से प्रतिनिधि चुनने पर गांव में प्रेम और एकता बनी रहती है। इससे विकास कार्यों को भी गति मिलती है। निर्विरोध निर्वाचित होने वाली पंचायत में राजस्थान सरकार की ओर से विशेष प्रोत्साहन के रूप में अतिरिक्त विकास कार्य कराए जाते रहे हैं।
निर्विरोध चुनाव में खास बात यह भी है कि वार्ड पंच के लिए प्रशासन की ओर से निकाली जाने वाली लॉटरी में जिस वर्ग के लिए सीट आरक्षित होती है, पूरा गांव उसी वर्ग से एक उम्मीदवार तय करता है। इस प्रक्रिया में सर्व समाज की एकजुटता सहज नजर आती है।
ग्रामीण इससे पहले 11 बार निर्विरोध वार्ड पंच चुन चुके हैं। यानी 11 बार सर्वसम्मति से वार्ड पंच चुना गया। यदि परंपरा कायम रही तो इस बार 12वीं बार वार्ड पंच निर्विरोध चुना जाएगा।
इधर, प्रदेश में हो रहे पंचायती चुनाव में शिक्षक-कर्मचारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त कार्यभार का हवाला देते हुए सियाराम शिक्षक संघ ने पर्याप्त कार्मिक, संसाधन, बजट और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग को लेकर राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा है। सियाराम संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी वीरेंद्र चौधरी ने बताया कि चुनाव के दिन पंच और सरपंच के चुनाव के लिए मतदान के दिन पूर्व तैयारी में न्यूनतम तीन घंटा लगता है। अतः अतिरिक्त कार्मिकों, लैपटॉप, प्रिंटर उपलब्ध कराने चाहिए़। उन्होंने कहा कि उसके बाद मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक निरन्तर 11 घंटे तक नियत है। इसलिए अतिरिक्त कार्मिकों की जरूरत है, किन्तु प्रशासन उन्हीं शिक्षक कर्मचारियों से जबरन दिन रात लगातार काम लेता है, जो कि विधि विरुद्ध है।
संगठन ने कहा कि मतदान की समाप्ति के बाद की तैयारी में भी सीलिंग पैकिंग में भी तीन घण्टे ओर विभिन्न फॉर्म भरने में इससे कुछ अधिक समय लगता है। कुल न्यूनतम समय 12 घंटे 30 मिनट या अधिक कार्य लेने से शिक्षक कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उसी दिन पंचों और सरपंच के मतों की गिनती भी करने और उनका परिणाम भी घोषित करने में, निर्वाचन के प्रमाणपत्र देने में, शपथ दिलाने में और अन्य अनेक आवश्यक कार्यों को पूरा करने में अगली तिथि के रात्रि दो बजे से चार तक भी बज जाते हैं। लगातार 19 घंटे से अधिक काम करने के बाद में सब अभिलेखों को पूर्ण करके सुरक्षित भी रखना होता है। संगठन ने राजस्थान मानवाधिकार आयोग से भी इस प्रक्रिया पर तुरन्त संज्ञान लेने और मत पत्र निर्माण, आवेदन भरवाने ,छांटने,पात्र चयन करने, सिम्बोल आवंटन, मत गणना सहित प्रत्येक कार्य कंप्यूटर से एवं उपखण्ड स्तर पर करवाने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष नवीन जोशी, ललित आर पाटीदार, अशोक शर्मा, नानू राम डामोर, डाया लाल यादव, अरुण व्यास, लोकेश पटेल, लोकेश पंड्या, सतीश जोशी, बदन लाल डामोर, जिला मंत्री महिपाल भुता सहित कई शिक्षक कर्मचारी शामिल रहे।
Updated on:
05 Oct 2026 08:51 am
Published on:
05 Oct 2026 08:51 am
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