Banswara : बांसवाड़ा के लोधा में हर मास एक उपवास महाभियान कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा कि चमड़ी-दमड़ी के पीछे मत भागो। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी कही बड़ी बात।
Banswara : बांसवाड़ा के लोधा में हर मास एक उपवास महाभियान कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा कि जीवन व्याधियों से घिरा है, तो इसके पीछे मूल कारण है हमारे आहार और विचार पर नियंत्रण नहीं है। आहार-विचार पर नियंत्रण रखेंगे, तो मोटापा, हार्ट अटैक, कैंसर, शुगर, कॉलेस्ट्रोल, बीपी हर बीमारी दूर रहेगी। जितना कम खाएंगे, उतने हल्के रहेंगे। जीते जी भी सुखी रहेंगे और मरने के बाद कंधे देने वालों को भी सुखी रखेंगे।
बाबा रामदेव ने आगे कहा पूरी दुनिया चमड़ी-दमड़ी के पीछे भाग रही है पर यदि मुक्ति की मूरत देखनी हो तो जैन साधुओं की सूरत देखना चाहिए। दिगंबर कोई प्रदर्शन नहीं है। दिगंबर भावों की मुक्ति है और वह अपने तपोबल से स्वयं और दूसरों का जीवन महकते हैं।
बाबा रामदेव ने कहा कि कैंसर जैसी व्याधियां हमने योग एवं संतुलित आहार से दूर की है। पेट को आराम देने के लिए एक समय भोजन करें और दूसरे समय फलों और ककड़ी आदि का उपयोग करें। शाम के समय लॉकी को उबाल कर उसको खाया करें। पेट स्वस्थ रहेगा। आंवला, गिलोय, लॉकी, तुलसी, नीम आदि को जीवन में अपना लो।
विश्व स्वास्थ्य दिवस पर बांसवाड़ा की धरा से मंगलवार को अध्यात्म के मंच से स्वास्थ्य का नया अध्याय जुड़ा। एक ही मंच पर अध्यात्म, राजनीति, योग एवं साहित्य का संगम हुआ, जहां साधु-संतों, योगगुरु, मॉटीवेशन स्पीकर एवं साहित्यकारों ने एक स्वर में दिगम्बर जैनाचार्य प्रसन्न सागर के हर मास एक उपवास महाभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हुए इस अभियान को जन-जन का अभियान बनाने का आह्वान किया।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि आज भारत के इर्द-गिर्द जितने भी देश है वह लड़ रहे हैं। वहां अशांति छाई हुई है। पर, केवल भारत ही एकमात्र देश है, जहां शांतचित्त है और सुरक्षित है। हमारे हिन्दुस्तान के लिए कहा जाता है कि वह विश्वगुरु है, तो वह है और इसके पीछे मूल कारण हमारी अध्यात्मिक और योगिक शक्ति है। हमे हमारे गुुरुओं, साधु-संतों से यह सीखना चाहिए कि जीवन की भागदौड़ के बीच हम अध्यात्म, योग एवं सांसारिक कर्मों के बीच सामंजस्य कैसे स्थापित करें।
आचार्य प्रसन्नसागर ने कहा कि अग्नि का स्वभाव है कि वह गर्माहट देती है। बर्फ की तासीर है कि वह ठण्डक का अहसास कराती है। फूलों से महक आती है। उसी तरह उपवास करने से साधना का पथ प्रशस्त होता है। आराधना की राह आसान होती है। जीवन वहीं सफल होते हैं, जो गुरु की कही करते हैं। गुरु के कार्य में बुद्धि नहीं लगाते हैं। आज अधिकांश क्लेश क्यू और यूं के वजह से हो रहे हैं। पूरा देश क्यू-यूं के अहंकार से मुक्त हो जाए, तो सारे फसाद खत्म हो जाएंगे। अच्छा सोचेंगे, तो अच्छा होगा। खुद को नकारात्मक चीजों से दूर रखेंगे, तो सफल होंगे।
राष्ट्रीय कवि हरिओम पंवार एक बार फिर अपना जादू बिखेर गए। पंवार ने ऑपरेशन सिंदूर पर रचना सुनाकर माहौल में जोश भर दिया। हर संकट का हल न पूछो आसमान के तारों से…, सूरज कब रोशनी लेता है, चांद-तारों से रचना सुनाकर खूब तालियां बजवाई।
मॉटीवेशन स्पीकर उज्ज्वल पाटनी ने कहा कि हमेशा जिंदों की भाषा बोले, मुर्दों की नहीं। कोई भी पूछे कैसे हो, तो उसे यह अहसास करवाओं कि तुम दुनिया के सबसे श्रेष्ठ इंसान हो और तुमसे अधिक अच्छा समय किसी का नहीं चल रहा है। हमारी लेंग्वेज सकारात्मक होगी, तो सकारात्मक होगा।
पाटनी ने कहा कि रोज रात को सोते समय स्वयं से दो सवाल करो। पहला आज ऐसा क्या किया, जो मुझे नहीं करना चाहिए था और दूसरा आज मैंने ऐसा क्या किया, जिससे मुझे स्वयं पर गर्व है। हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हम ऐसा करें, जिससे स्वयं, परिवार, प्रांत और देश का नाम गौरवान्वित हो।
योगगुरु बाबा रामदेव, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे, मॉटीवेशनल स्पीकर उज्जवल पाटनी, महामण्डलेश्वर स्वामी हितेश्वरानंद सरस्वती, रामकथा वाचक कमलेश शास्त्री, बाबा सत्यनारायण मौर्य, पर्यावरणीविद् प्रवीण नायक सहित राष्ट्रीय कवि हरिओम पंवार आदि के आतिथ्य में कार्यक्रम हुए। करीब साढ़े तीन घंटे चले कार्यक्रम में मंच से वक्ताओं ने स्वस्थ्य जीवन के लिए अनुशासित जीवन प्रणाली को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में योगगुरु बाबारामदेव, पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गाशंकर मिश्रा, पत्रकार सुप्रिय प्रसाद, राष्ट्रकवि हरिओम पंवार को उनके योगदान के लिए ढाई-ढाई लाख रुपए नकद एवं प्रशस्ति पत्र आदि से सम्मानित किया। साथ ही मंचासीन नारायाण मौर्य व प्रवीण नायक सहित अन्य का भी बहुमान किया।
हर मास एक उपवास कार्यक्रम में शामिल आचार्य प्रसन्नसागर, योगगुरु बाबा रामदेव एवं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे। संतों के समकक्ष लगे सोफे पर राजे को बिठाया गया। पर, वे मंच पर ही सोफे के नीचे बैठी और बोलीं कि संतों की बराबरी हम आम मनुष्य नहीं कर सकते हैं…।