Panther, Panther cub, Panther in Banswara, Forest in Banswara, Forest Area in Banswara, Tripura Sundri Tample बांसवाड़ा जिले के त्रिपुरा सुंदरी के पास शावक को ढूंढऩे के लिए रोजाना पहुंचता है पैंथर का कुनबा
बांसवाड़ा/तलवाड़ा. परिवार के किसी सदस्य के बिछडऩे का दर्द तो वही जान सकता है, जिसने परिवार के किसी सदस्य को खोया हो। आमतौर पर यह पीड़ा मानव जीवन में ही देखने को मिलती है। लेकिन बांसवाड़ा जिले में त्रिपुरा सुंदरी मंदिर के पास खनन क्षेत्र में यह दर्द आजकल एक पैंथर (Panther) परिवार में देखने को मिला रहा है। जहां बीते कुछ दिनों से पैंथर (Panther) का कुनबा अपने परिवार के एक शावक (CUB) की तलाश में रोजाना पहुंच रहा है। इंसानों में दिखलाई पडऩे वाला अपनत्व का भाव पैंथर परिवार में देख क्षेत्र में कौतूहल का विषय तो बना ही। साथ ही एक स्थान पर रोजाना पैंथर के कुनबे के पहुंचने से लोगों में भय भी बैठा है।
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर (Tripura Sundri Tample) से कुछ दूर स्थित खनन क्षेत्र में इन दिनों ग्रामीणों में पैंथर के कुनबे का खौफ साफ-साफ देखने को मिला रहा है। हालांकि इस कुनबे ने किसी का आहत नहीं किया है। लेकिन पैंथर (Panther के खौफ से लोगों ने रास्ता तक बदल लिया है। दरअसल, खनन क्षेत्र में नर-मादा पैंथर और शावक देरशाम या रात में वहां पहुंचकर चारों ओर देखते हैं और काफी देर तक गुर्राते हैं, मानों किसी को आवाज लगा रहे हों। साथ ही ग्रामीणों ने बताया कि शायद ये कुनबा बिछड़े शावक की तलाश में वहां पहुंचकर ढूंढने का प्रयास करता है।
परिवार से यों दूर हुआ शावक
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ पूर्व ग्रामीणों ने शावक (cub) को पैंथर (Pantherके साथ देखा था, उस शावक का वन विभाग की टीम की ओर से रेस्क्यू किया गया था। शावक के परिवार के बिछडऩे के बाद से ये कुनबा परेशान नजर आ रहा है। और शावक को ढूंढने का प्रयास कर रहा है। वहीं, ग्रामीणों ने बताया कि कुनबे के कारण लोगों में खासा भय है। कई लोगों ने तो उधर से निकलना ही छोड़ दिया है।
नहीं किया हमला
ग्रामीणों ने बताया कि इस कुनबे ने अभी तक किसी भी ग्रामीण या राहगीर को हताहत नहीं किया है। लेकिन पूर्व में पैंथर के द्वारा किए हमलों के कारण ग्रामीणों में डर बैठा है। हमेशा से ही आसपास के इलाकों में पैंथर की चहलकदमी देखने को मिलती रही है।