बांसवाड़ा : सांई के दरबार में सौहार्द की पंगत पर बंटता प्रेम का प्रसाद

13 वर्ष से अनवरत जारी है सेवा-प्रकल्पों का कारवा, फिजूल खर्च नहीं कर पीडि़त मानवता की सेवार्थ देने लगे है सहयोग
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Jul 21, 2017
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न जात, न पात, न मजहब का कोई बंधन। उसके दरबार में जो भी आया वह भूखा नहीं लौटा। भोजन भी स्नेह और सौहार्द की हांडी में पके शुद्ध सात्विक पकवान। सेवा का यह अनूठा कारवां तेरह वर्ष से अनवरत जारी है। इसे न तेज वर्षा कभी रोक पाई और नहीं कड़कड़ाती सर्दी या तीक्षण गर्मी।

हम बात कर रहे हैं रतलाम मार्ग पर स्थित साईबाबा मंदिर में संचालित ओम श्री शिरड़ी साई बाबा दीनबंधू ट्रस्ट के सेवा-प्रकल्पों की। वर्ष 2004 से मंदिर स्थापना के साथ ही शुरू हुए ट्रस्ट के सेवा-प्रकल्पों ने कभी थमने का नाम नहीं लिया। ट्रस्ट की ओर से हर गुरुवार सहित मंदिर पाटोत्सव और गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर मां अन्नपूर्णा की जाजम बिछती है और यहां आने वाले हर कौम के शख्स सौहार्द की थाली में प्रेम के पकवान खाकर जाता है। सरकार की ओर से अब आठ रुपए में भोजन और पांच रुपए में नाश्ता करवाया जा रहा है। जबकि, ट्रस्ट ने तो इसकी नींव तेरह वर्ष पूर्व ही रख दी थी।

एक आह्वान और बदलाव की बयार...


ट्रस्ट ने कुछ वर्ष पूर्व आह्वान किया। इस पर अब बांसवाड़ा सहित अन्य जिलों के कई लोग इस मंदिर से जुड़े हैं और वह अपने परिजनों के जन्मदिन, पुण्यतिथि सहित विभिन्न दिवस पर केक काटने एवं आतिशबाजी करने के बजाय ट्रस्ट में एक दिन के भोजन के लिए यथा सामथ्र्य सहयोग राशि जमा कराते हैं। सेवा के इस अनूठे प्रकल्प के प्रति अब लोगों का उत्साह इतना है कि वर्ष की शुरुआत में ही पूरे वर्ष के भामाशाह तैयार हो जाते हैं। इस वर्ष के भी सभी गुरुवार बुक हैं।

फेक्ट-फाइल

- 2004 से चल रहा है सेवा-प्रकल्प
- 3000 बच्चों को स्कूल डे्रस का किया वितरण
- उत्तम स्वामी महाराज की प्रेरणा से शुरू की थी सेवा
- हर गुरुवार 500 से 700 को मिलता है शुद्ध नि:शुल्क भोजन
- गुरु-पूर्णिमा एवं बसंत पंचमी पर 15 हजार लोगों का होता है भण्डारा


प्रेम का प्रसाद

ट्रस्ट के अध्यक्ष हर्ष कोठारी बताते हैं कि यहां हिन्दू-मुस्लिम सहित सभी समुदायों के अमीर-गरीब तबके के लोग प्रेम से प्रसाद पाते हैं। पूड़ी, सब्जी, देसी घी का हलवा एवं केसरिया मीठा भात खिलाया जाता है। ट्रस्ट में सचिव धरणीधर पण्ड्या, जनसंपर्क प्रभारी शैलेन्द्र वोरा, आरके अय्यर सहित शहर के विभिन्न स्वयंसेवी संगठन, सरकारी-गैर सरकारी महिला संगठन जुड़े हैं तथा तन-मन-धन से सहयोग कर रहे हैं।

Published on:
21 Jul 2017 11:49 am