
Banswara Panchayat election: दीनबंधु वशिष्ठ/बांसवाड़ा। केसरपुरा पंचायत का उमराखाल गांव लोकतंत्र की अनूठी मिसाल है। राजनीतिक बिसात पर इस गांव में शह-मात का खेल नहीं खेला जाता, बल्कि 150 परिवार एक जाजम पर बैठकर सर्वसम्मति से अपना वार्ड पंच चुन लेते हैं। पिछले 40 साल से गांव की यह परंपरा बिना किसी राजनीतिक कटुता और रंजिश के आज भी चली आ रही है। जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में एक बार फिर निर्विरोध निर्वाचन की तैयारी पूरी हो चुकी है।
यहां 150 परिवारों के करीब 450 मतदाता हैं। यहां गत दिनों माताजी मंदिर पर हुई एकता ग्राम संगठन उमराखाल की बैठक में दिनेश मईड़ा की अध्यक्षता में सर्वसम्मति से एक नाम पर मुहर लगाई। हर पांच साल की इस बार भी ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक में सतवीर निनामा अथवा उनकी पत्नी को निर्विरोध रूप से अपना वार्ड पंच बनाने का प्रस्ताव पारित किया है।
गांव के समाजसेवी दिनेश मईड़ा ने बताया कि गांव में समाज सुधार को लेकर समय-समय पर कई निर्णय नहीं लिए गए हैं। इनमें शराब बंदी, डीजे, तंबाकू सेवन और अंधविश्वास जैसी बुराइयों पर लगाम लगाकर इन्हें दूर किया है। इसी नवाचार के तहत निर्विरोध निर्वाचन की परंपरा शुरू की है, जो सालों से चली आ रही है। जो भी परंपरा को तोड़ता है, उस पर आर्थिक जुर्माना लगाया जाता है। उससे सामूहिक विकास के कार्य करवाए जाते हैं। गांव में सामुण्डा माताजी का एक मंदिर सामूहिक प्रयासों से तैयार किया गया है।
बचपन से ही हमने गांव में निर्विरोध निर्वाचन की परंपरा देखी है। उसी परंपरा को हम आगे बढ़ा रहे हैं। इसी के तहत उमराखाल गांव में पिछले 40 सालों से निर्विरोध वार्ड पंच चुनते आ रहे हैं। मैं खुद तीन बार निर्विरोध वार्ड पंच रह चुका हूं।
कालूराम मईड़ा, सरपंच, ग्राम पंचायत केसरपुरा
वालू पुत्र केरेंग मईडा - पांच साल के लिए निर्विरोध
मांगू पुत्र पुंजा - दस साल निर्विरोध
कालूराम पुत्र शंभु मईड़ा - 15 साल तक निर्विरोध
शारदा पुत्र कन्हैयालाल - पांच साल के लिए निर्विरोध
रमिया पत्नी विकास डोडियार - पांच साल के लिए निर्विरोध