Black Fungus News : क्षण दिखने पर रैफर, रोगियों को परिजन ले गए उदयपुर-अहमदाबाद
बांसवाड़ा/परतापुर. जिले में कोरोना संक्रमण का फैलव रोकने और मौजूदा रोगियों को बचाने के लिए चल रहे संघर्ष के बीच पोस्ट कोविड मरीजों में ब्लैक फंगस भी आफत प्रवेश कर गई है। इससे प्रभावित बांसवाड़ा शहर में परतापुर में दो-दो रोगी सामने आए हैं। इस पर उन्हें रैफर करने पर परिजन उदयपुर, अहमदाबाद ले गए।
एमजी अस्पताल में पृथ्वीगंज क्षेत्र से एक ७० वर्षीय महिला का मामला सिरदर्द और नाक से पानी गिरने की शिकायत पर आया, जबकि रोगी से हिस्ट्री पूछी गई। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश बिसारिया के अनुसार तीन पहले आए रोगी ने पूछताछ पर जानकारी दी कि उसे कोविड हो चुका है और मधुमेह की भी शिकायत है। इस पर लक्षणों से संदेह होने पर एमआरआई करवाया, तो उससे अंदर इरोजा, साइनस और ऑप्टिकल वेन प्रभावित दिखे। इस पर उच्चाधिकारियों को सूचना देकर मरीज को रैफर करवाया गया। इसके अलावा एक केस निजी अस्पताल में आया। यहां लोधा की पोस्ट कोविड महिला आंख दुखने की परेशानी पर पहुंची तो जांच के दौरान दिखे लक्षण से नेत्र रोग विशेषज्ञ को शंका हुई। इस पर उसे भी उदयपुर रैफर किया गया। उधर, परतापुर सीएचसी के कोविड सेंटर पर शुक्रवार को ओडवाड़ा और मोर गांवों से आए दो रोगियों की प्रारंभिक जांच में ब्लैक फंगस के लक्षण मिले। सीएमएचओ डॉ. हीरालाल ताबियार ने बताया कि प्रभारी डॉ. विपिन बुनकर ने जानकारी देकर मार्गदर्शन मांगा, तो बांसवाड़ा में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हरीश लालवानी पिछले दिनों कोरोना संक्रमित होने से होम आइसोलेट होने और यहां जरूरत पर उच्च चिकित्सा संस्थान जैसी सर्जरी आदि की व्यवस्था नहीं होने पर दोनों रोगियों को उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज रैफर करने के निर्देश दिए गए।
गौरतलब है कि इससे पहले बड़ोदा में उपचार के बाद बागीदौरा की एक महिला की तबियत फिर खराब होने ले जाई गई थी। फिर वहां ब्लैक फंगस से मृत्यु की जानकारी आई। उक्त महिला ने आरटीपीसीआर टेस्ट या उपचार बांसवाड़ा में नहीं हुआ, इसलिए कोई जानकारी नहीं रही। फिर लौटने के बाद फिर तबियत बिगड़ी तो उसे दोबारा बड़ोदा ले जाया गया। वहीं उपचार के दौरान निधन हुआ। इसके चलते जिले के रेकॉर्ड में ब्लैक फंगस का कोई केस नहीं आया।
मिले पेरेस्थिसिया और अन्य लक्षण
परतापुर सीसीसी प्रभारी डॉ. बुनकर के अनुसार यहां मिले दोनों मरीजों की केस हिस्ट्री से पता चला कि ओड़वाड़ा एवं मोर गांव के दोनों रोगी ५० से ६० वर्ष की आयु के हैं। कोरोना की पुष्टि इनके सीटी स्केन में दस और ग्यारह के स्कोर से हुई। हालांकि इसमें एक रोगी ने आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया था। बाद में इनका सागवाड़ा और मोडासा गुजरात में उपचार करवाया हुआ और स्वस्ाि होकर लौटने के कुछ दिन बाद ब्लैक फंगस जैसे सिम्पटम आए। इनमें एक मरीज को पेरेस्थिसिया की शिकायत देखी गई, जिसमें होठ से ऊपर कुछ महसूस नहीं हो रहा था। इसके अलावा दूसरे के नाक में कुछ काला लिक्विड दिखाई दिया, जिससे संदेह गहराया। दोनों मरीजों को उदयपुर रैफर किया गया। हालांकि इनमें से एक के परिजन उसे अहमदाबाद ले गए।
ज्यादा में गुजरात कराकर लौटे कई, और रोगी आने की आशंका
सीमावर्ती जिला होने और गुजरात में बेहतर उपचार सुविधा के चलते बांसवाड़ा से बड़ी संख्या में लोग अहमदाबाद, मोडासा, हिम्मतनगर, बड़ोदा तक इलाज के लिए जाते हैं। वहां से स्वस्थ होकर लौटे रोगियों को स्टेरॉइड जैसी दवाइयां लगातार दिए जाने पर ऐसे और केस जिले में आने की आशंका है। सीएमएचओ डॉ. ताबियार ने भी ब्लैक फंगस के और रोगी मिलने की आशंका से इनकार नहीं किया है। हालांकि उनका कहना है कि अभी लक्षण के अनुसार प्रतीत हुए रोगियों को भी डायग्नोस किया जाएगा। उसके बाद ही ब्लैक फंगस की पुष्टि होगी। बावजूद इसके स्टेरॉइड के ज्यादा इस्तेमाल के बाद जिले में स्वस्थ होकर लौटे रोगियों में ब्लैक फंगस की शिकायत आ सकती है। उन्होंने ऐसे लक्षण पर घबराए बगैर समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की सलाह दी है।