बांसवाड़ा

बैलों और गायों ने एक साथ दौड़ लगाई, जीत के साथ मिला अगले साथ अच्छी फसल-बारिश का संकेत

चितरोडिया गांव में मंदिर परिसर मार्ग पर बैलों और गायों ने एक साथ दौड़ लगाई। ढोल-नगाड़ों के साथ पूजा के बाद यह दौड़ 15 मिनट तक चली। सफेद रंग की गाय ने दौड़ जीती। स्थानीय लोगों का मानना है कि सफेद गाय की जीत से अच्छी बरसात और फसल उत्पादन होता है।

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आनंदपुरी। ग्राम पंचायत मेनापादर में शनिवार को गाय के तोरण लांघने की परंपरा का निर्वाहन किया गया। एक साथ कई रंगों की गाए दौड़ाई गई, जिसमे सफेद गाय ने तोरण पार किया। इससे क्षेत्र में अच्छी बारिश व फसल का संकेत माना गया। ग्राम पंचायत मैनापादर में दिवाली के बाद एकम पर अनूठी परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। गायों की दौड़ व तोरण लांघने के आधार पर तय किया जाता है अगली फसल की पैदावार कैसी होगी। दरअसल, ग्रामीण इसे गाय तोरण मेला कहते हैं। जिसमें क्षेत्र के पशुपालक, किसान और अन्य लोग शामिल हुए। मेले में सभी पशुपालक अपनी अलग-अलग रंगों की गायों को सजाकर यहां पहुंचे।

कई पुशपालक तो गायों को मेहंदी व थापा भी लगाया और गले में घंटियां व घुंघरू बांधे गए। इसके बाद गायों को दौड़ के लिए तैयार किया गया। इसमें जिस रंग की गाय सबसे पहले ध्वज रूपी तोरण को लांघती है, उसी के आधार पर अगली फसल का का पकने का अनुमान लगाया जाता है। इसमें मान्यता है कि सफेद रंग की गाय अगर तोरण लांघती है तो उसे शुभ माना जाता है। इससे अगली फसल अच्छी होती है। वहीं अगर लाल रंग की गाय तोरण लांघती है तो अच्छी बारिश होती है। जो किसानों के सुख और समृद्धि के रूप में देखा जाता है।

यहां पर ढोल, कुंडी बजाई गई। कुछ दूरी पर एक ध्वजामयी तोरण द्वार तैयार किया गया। सभी गायों को एक साथ दौड़ाया गया। ग्रामीण चारों ओर खड़े हो गए ओर ढोल, कुंडी की आवाज धीरे-धीेरे तेज हो गई।इस दोरान सफेद रंग की गाय ने सबसे पहले तोरण पार किया। इसके बाद ग्रामीण मेले में खरीदारी करते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। गाय तोरण मेले में पशुपालक समिलित हुए।

Updated on:
03 Nov 2024 05:27 pm
Published on:
03 Nov 2024 05:23 pm
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