
स्थायीकरण की मांग को लेकर धरना देते संविदा कार्मिकों का फाइल फोटो: पत्रिका
बांसवाड़ा। प्रदेश में बांसवाड़ा सहित तीन जिलों के संविदाकर्मी अधिकारियों की गलती और सिस्टम की खामियों की सजा भुगत रहे हैं। 18 साल से संविदा पर सेवा दे रहे बांसवाड़ा, डूंगरपुर और सिरोही जिले के संविदाकर्मी आज भी सरकार के चक्कर काट रहे हैं और स्थायीकरण की राह देख रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकार के नए नियमों के बाद, जहां प्रदेश के अन्य जिलों में संविदाकर्मी साल 2022 में स्थायी हो चुके हैं। वहीं बांसवाड़ा, डूंगरपुर और सिरोही जिले के संविदाकर्मी आज भी अस्थायी ही हैं। उन्हें सरकार के स्थायीकरण को लेकर बनाए गए नियम का लाभ नहीं मिल पा रहा है। तत्कालीन अफसरों की लापरवाही और नियमों की उलझन ने इन्हें उस लाभ से दूर कर दिया, जो प्रदेश के अन्य जिलों के संविदाकर्मियों को 2022 में मिल चुका है।
साल 2008 में जिला परिषद में 200 लोगों की जिले में भर्ती हुई थी। विभाग ने प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से विज्ञप्ति निकालकर संविदाकर्मी नियुक्त किए थे। तत्पश्चात 2010 में जिला कलेक्टर एवं वित्त विभाग के आदेश अनुसार इन्हें प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से सीधे संविदा पर नियोजित किया गया था। उस समय विभाग ने विज्ञापन जारी नहीं कर सीधे अनुभव एवं संतोषप्रद सेवा को आधार मानते हुए इन्हें संविदा पर नियोजित कर दिया।
लेकिन लोक विज्ञापन जारी नहीं हुआ। यही चूक आज इन कर्मियों के स्थायीकरण में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। पिछली कांग्रेस सरकार ने कार्यकाल पूरा होने पर साल 2022 में जाते-जाते संविदाकर्मियों के नियमितीकरण के लिए नियम बनाए, जिनमें केवल लोक विज्ञापन के जरिए नियुक्त कर्मियों को स्थायी किया गया। नतीजा यह हुआ कि प्रदेश के अन्य जिलों के कर्मचारी स्थायी हो गए, जबकि बांसवाड़ा, डूंगरपुर और सिरोही के कर्मियों की उम्मीदें अधर में लटक गईं।
स्थायीकरण नहीं होने को लेकर पिछले ढाई साल से नरेगा कार्मिक संघ आंदोलन की राह पर है। इसे लेकर संघ की ओर से जिला कलक्टर सहित मुख्य सचिव और विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री तक को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। लेकिन अभी तक इस बारे में कोई समाधान नहीं निकला है।
152 बांसवाड़ा संविदा कार्मिक जिले में वर्तमान में कार्यरत
100 संविदा कार्मिक डूंगरपुर जिले के
80 संविदा कार्मिक सिरोही जिले के
2008 में जिला परिषद ने प्लेसमेंट एजेंसी के तहत की थी भर्ती
अल्प मानदेय में कार्य करना मजबूरी संघ की ओर से जिला कलक्टर सहित ग्रामीण विकास विभाग मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा व मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। लेकिन स्थायीकरण नहीं होने से महंगाई के जमाने में भी अल्प मानदेय में कार्य करने को विवश है। सरकार को इस मामले में संविदा कर्मियों को स्थायीकरण कर राहत देनी चाहिए।
मितेंद्र सिंह राठौड़, उपाध्यक्ष, नरेगा कार्मिक संघ
इनका कहना है…
सरकार के 2022 में बने नियमों के चलते इन्हें परेशानी आ रही है। संविदा कर्मियों के इस मामले को लेकर हमने राज्य सरकार को पत्र भी लिखा है।
गोपाल लाल स्वर्णकार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, बांसवाड़ा
Published on:
23 Jan 2026 05:10 pm
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