
अधिकांश स्थानों पर लगाए गए पौधे सुरक्षा और देखभाल के अभाव में कुछ ही महीनों में नष्ट हो जाते हैं
धंबोला. पौधे लगाने से नहीं, उन्हें पेड़ बनाने से तय होती है अभियान की सफलता। 2024 और 2025 में लगे हजारों पौधों में से अधिकांश नष्ट, अब 2026 के नए अभियानों पर उठे सवाल। राजस्थान सरकार हरित राजस्थान के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष जून और जुलाई माह में राज्यव्यापी पौधरोपण अभियान चलाती है। ग्राम पंचायतों, राजकीय विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और विभिन्न सरकारी विभागों को हजारों पौधे लगाने के लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में बड़े स्तर पर पौधारोपण भी किया जाता है, लेकिन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान की वास्तविक तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। अधिकांश स्थानों पर लगाए गए पौधे सुरक्षा और देखभाल के अभाव में कुछ ही महीनों में नष्ट हो जाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस वर्ष लगाए जा रहे पौधों की नियमित निगरानी कर सुरक्षा, सिंचाई और संरक्षण की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी अभियान वास्तव में पर्यावरण संरक्षण का मजबूत माध्यम बन सके।
ट्री-गार्ड न सिंचाई: 'कागजों में हरा-भरा' हुआ अभियान
पौधे लगाने के बाद उनकी सुरक्षा, सिंचाई और नियमित देखभाल की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जाती। परिणामस्वरूप वर्ष 2024 और 2025 में लगाए गए हजारों पौधों में से अधिकांश आज धरातल पर दिखाई ही नहीं देते। कई ग्राम पंचायतों में लगाए गए पौधों में से मुश्किल से कुछ पौधे ही जीवित बचे हैं, जबकि बाकी पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार खुले स्थानों पर लगाए गए पौधों को नीलगाय, जंगली सुअर और पशु आसानी से नुकसान पहुंचा देते हैं। अधिकांश पौधों के चारों ओर न तो ट्री-गार्ड लगाए जाते हैं और न ही फेंसिंग की जाती है। दूसरी ओर भीषण गर्मी के दौरान नियमित सिंचाई नहीं होने से पौधे सूख जाते हैं। ऐसे में हर वर्ष लाखों पौधे लगाने के बावजूद हरियाली बढ़ने के बजाय सरकारी रिकॉर्ड ही हरा-भरा नजर आता है।