
बांसवाड़ा. जिले में अब तक कोरोना संक्रमण से ग्रसित एक भी व्यक्ति सामने नहीं आने के संतोष के बीच लाखों की संख्या में स्क्रीनिंग होने के बाद अब चिकित्सा विभाग की निगाह घरों में क्वारेंटाइन किए लोगों पर टिक गई है। आपात स्थिति से निबटने जिला मुख्यालय के एमजी अस्पताल के आधे से ज्यादा हिस्से को आइसोलेशन और क्वारेंटाइन बनाया जा रहा है। इससे अस्पताल की तस्वीर ही बदल गई है। पीएमओ डॉ. एनएल चरपोटा के अनुसार हालांकि रविवार को भी दो सौ से ज्यादा लोगों की एमजी अस्पताल में स्क्रीनिंग हुई, लेकिन इनमें ज्यादातर ऐसे थे तो बाहर जाने की तैयारी में थे। ऐसे में अब जिले में मौजूदा लोगों में से ही किसी संदिग्ध के आने और उसके संपर्क में बड़ी संख्या में लोग होने पर उपचार के बंदोबस्त को लेकर सक्रियता बढ़ी है। इधर, नर्सिंग अधीक्षक नवनीत सोनी ने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर जहां-तहां गुंजाइश पर आइसोलेशन विस्तार और क्वारेंटाइन के लिए बैड लगाए गए हैं। फिमेल वार्ड को पीडियाट्रिक में शिफ्ट कर वहां कर्टन, सेपरेटर आदि लगवाकर 54 बैड की व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है। इसके अलावा ऑर्थोपेडिक वार्ड में 15, केंसर वार्ड में 10, आई वार्ड में 25 के बंदोबस्त किए गए हैं। पीडियाट्रिक वार्ड पीएनसी के पास शिफ्ट किया गया है, वहीं जेरियाट्रिक, बंदियों का वार्ड और कॉटेज वार्ड के कमरे पहले ही विस्तारित आइसोलेशन वार्ड में शामिल किए जा चुके हैं। अब तक 180 बैड का बंदोबस्त हो गया है, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को भर्ती करने में दुविधा नहीं रहे। गौरतलब है कि एमजी अस्पताल 350 बैड का ही है और नई व्यवस्थाओं में अब केवल एमसीएच विंग, टीबी वार्ड और कुछ हिस्सा ही अब बदलाव से अछूता है।
ओपीडी और दवा वितरण में भी बदलाव : - ओपीडी में सामान्य या गंभीर बीमारियों पर भर्ती योग्य रोगियों के लिए यहां व्यवस्था पहले से अलग कर दी गई है। स्क्रीनिंग कराने वालों के लिए पीछे जेरिएट्रिक वार्ड में व्यवस्था है, वहीं अनजाने व संदिग्धों की भीतर आवाजाही से संक्रमण फैलने के अंदेशे पर निशुल्क दवा वितरण का अंदर का एक काउंटर बंद कर 24 नंबर ही रखा गया है। इससे भी दवाइयां अस्पताल परिसर में बाहर से खिडक़ी के जरिए दी जा रही हैं। इसके अलावा यहां उपभोक्ता भंडार के करीब सामान्य रोगियों के लिए दवा वितरण केंद्र बनाया हुआ है।