बांसवाड़ा

पश्चिम बंगाल का युवक, फर्जी डॉक्टर बन कर रहा था लोगों का उपचार, पुलिस ने मारा छापा

चिकित्सा विभागीय टीम की जांच के बाद एफआईआर, आनंदपुरी थाने में आरोपी के साथ सहयोगी भी नामजद

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पश्चिम बंगाल का युवक, फर्जी डॉक्टर बन कर रहा था लोगों का उपचार, पुलिस ने मारा छापा

बांसवाड़ा/आनंदपुरी. आनंदपुरी क्षेत्र में अवैध रूप से क्लीनिक संचालित कर इलाज के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे बंगाली नीम-हकीमों के खिलाफ चिकित्सा विभाग की टीम ने रविवार को भी कार्रवाई की। आनंदपुरी कस्बे से करीब 12 किलोमीटर दूर ओबला पंचायत अंतर्गत छायणा गांव में टीम पहुंची, तो क्लीनिक चला रहा तथाकथित डॉक्टर भाग छूटा। उसका सहयोगी पकड़ा गया।
ब्लॉक सीएमएचओ की टीम ने छायणा में कमल मंडल के क्लीनिक पर जांच के दौरान मरीजों का इलाज होते और बड़ी मात्रा में दवाइयां-इंजेक्शन का स्टॉक पाया। टीम ने क्लीनिक से दवाइयों के सेंपल लिए। उसके सहयोगी सोविक पुत्र सुजय से पूछताछ से पता चला कि मंडल लंबे समय से डॉक्टर बनकर इलाज कर रहा है, जबकि उसके पास क्लीनिक संचालन के वैध दस्तावेज नहीं है। टीम की रिपोर्ट पर बीसीसीएमएचओ डॉ. देवेंद्र डामोर ने आनंदपुरी थाने पहुंचकर एफआईआर दी। इसमें बताया कि आरोपी मंडल के खिलाफ आसपास के कई लोगों ने इलाज के नाम पर मनमाना पैसा वसूलने सहित अन्य शिकायतें की। उसे कई बार मौखिक निर्देेश दिए, लेकिन उसने नजरअंदाज किया। इधर, सीआई कपिल पाटीदार ने बताया कि बीसीएमएचओ की रिपोर्ट पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

समर्थक भी जुटे, स्वास्थ कार्यकर्ता के प्रमाण पत्र के बूते इलाज
इससे पहले आनंदपुरी सीएचसी के समीप अवैध तरीके से क्लीनिक संचालन पर नामजद कराए मिंटू मलिक ने सीएमएचओ से जारी प्रमाण पत्र दिखाते हुए सामुदायिक स्वास्थ कार्यकर्ता के रूप में काम करने के लिए अधिकृत होना बताकर कुछ लोगों का समर्थन जुटाया। क्षेत्र के मोहनलाल दलीचंद, मोहनलाल वलमजी, जयप्रकाश नानावटी, अक्षय ताबियार, अशोक कलाल, हेमंत कलाल, अशोक जैन, राजेंद्र टेलर, देवीलाल टेलर आदि ने थाने पहुंचकर परिवाद दिया। इसमें दस साल से सेवाएं दे रहे मलिक के पक्ष में बातकर दर्ज केस में निष्पक्ष जांच की मांग की। दूसरी ओर, बीसीएमएचओ डामोर ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ कार्यकर्ता फस्र्ट एड देने और सामान्य रोगों पर उपचार की सलाह दे सकता है, लेकिन प्रसव, डीएनसी कराने के लिए अधिकृत नहीं है। मलिक के क्लीनिक से गर्भपात कराने की गोलियां सहित कई ऐसी दवाइयां मिलीं, जिनका इस्तेमाल सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर भी विशेष परिस्थितियों में करते हैं। अवैध इलाज ग्रामीणों के लिए जानलेवा हो सकता है।

दवाइयों की खेप पर भी सवाल
दल की पड़ताल के दौरान बीते तीन दिन में दो कार्रवाइयों में दवाइयों-इंजेक्शन की बड़ी खेप मिली। इससे सवाल यह कि जब तथाकथित डॉक्टर अधिकृत ही नहीं है तो बड़ी मात्रा में दवाइयां इन तक आती कहां से हैं। स्थानीय स्तर पर सीधे मेडिकल स्टोर संचालकों से इनकी सप्लाई है तो इनकी भी विभागीय जांच होनी चाहिए।

Published on:
03 Oct 2021 10:49 pm
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