
बाराबंकी : नगीना सांसद चंद्रशेखर और करणी सेना के अभिनव सिंह के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। करणी सेना के अभिनव सिंह ने रविवार को बाराबंकी में हुई रैली को लेकर विरोध जताया था। रैली के दौरान चंद्रशेखर ने कहा था कि 'हम चमड़ा उतारना भी जानते हैं और उसका जूता बनाना भी…फिर उसे सिर पर…’। इस बयान के बाद बखेड़ा शुरू हो गया।
कांशीराम जयंती और अपनी पार्टी के स्थापना दिवस पर चंद्रशेखर आजाद ने बाराबंकी में एक विशाल जनसभा बुलाई थी। रैली से पहले ही करणी सेना के प्रदेश महामंत्री अभिनव सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्हें खुली चुनौती दी थी। अभिनव सिंह का कहना था कि चंद्रशेखर हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी करते हैं, इसलिए उन्हें बाराबंकी में घुसने नहीं दिया जाएगा।
धमकियों के बावजूद चंद्रशेखर रैली में पहुंचे और मंच से विरोधियों पर जमकर बरसे। उन्होंने अपने पुश्तैनी काम (चमड़ा उद्योग) का हवाला देते हुए प्रतीकात्मक लहजे में कहा, 'हम चमड़ा उतारना भी जानते हैं और उसका जूता बनाना भी… और समय आने पर उसे सिर पर पटककर मारना भी जानते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि भीम आर्मी का 'झंडा और डंडा' दोनों मजबूत हैं और वे किसी की गीदड़भभकी से डरने वाले नहीं हैं।
सांसद के इस बयान पर अभिनव सिंह ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि "हम भी जूते मारना जानते हैं।" इस जुबानी जंग ने जब तूल पकड़ा, तो करणी सेना के मुख्य संगठन ने अभिनव सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें संगठन से बाहर कर दिया। संगठन का मानना था कि उनकी बयानबाजी से माहौल अनावश्यक रूप से खराब हो रहा है।
निकाले जाने के बाद अभिनव सिंह ने अपने ही पुराने संगठन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 'संगठन को अब शेर नहीं, बल्कि सर्कस में नाचने वाले लोग चाहिए।' हालांकि, विवाद के बीच ही 'करणी सेना (सूरज पाल अम्मू गुट)' ने अभिनव सिंह का समर्थन किया और उन्हें अपने संगठन में 'प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष' की नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी।
चंद्रशेखर की सभा में एक युवक अचानक मंच पर पिस्टल लगाकर चढ़ गया था। वह चंद्रशेखर से बस कुछ दूरी पर ही था। लेकिन, तभी सुरक्षाकर्मियों ने उसे देख लिया और शक के चलते युवक को मंच के नीचे उतार दिया था। इसके बाद युवक को जनसभा से बाहर निकाल दिया गया था।