बाराबंकी

अडानी-अम्बानी के उत्पादों का बहिष्कार करेंगे किसान, आंदोलन को करेंगे और तेज

- किसानों के उग्र आंदोलन रोकने के लिए प्रशासन ने कस अपनी कमर - नेता की गिरफ्तारी के बाद किसानों ने हाइवे को जाम करना किया शुरू

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Dec 12, 2020
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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
बाराबंकी. किसान आन्दोलन अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां से उनका वापस लौटना लगभग मुश्किल हो गया है और वह सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गया है। आज भारत का किसान अपने आंदोलन को और तेज करते हुए हाइवे के सभी टोल प्लाजा को टोल मुक्त करने की घोषणा कर दी है। इसी को लेकर उत्तर प्रदेश के हर जिले में किसानों के उग्र आंदोलन रोकने के लिए प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है और चप्पे - चप्पे पर पुलिस तैनात कर दी है, वहीं किसान पुलिस की नाक में दम करने का मन जैसे बना चुका है।

बाराबंकी से होकर गुजरने वाला अयोध्या - लखनऊ राजमार्ग हो या लखनऊ - बहराइच राजमार्ग इन दोनों मार्गों पर पड़ने वाले टोल प्लाजा के चप्पे -चप्पे पर पुलिस तैनात कर दी गई है। टोल प्लाजा पर भी भरी संख्या पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस यहां किसानों को रोककर उन्हें मनाने पर लगी हुई है लेकिन किसान हैं कि मानने को तैयार नहीं हैं। नेता की गिरफ्तारी के बाद किसानों ने हाइवे को जाम करना शुरू भी कर दिया है हलाकि पुलिस लगातार उन्हें मानाने का काम कर रही है, मगर किसान सड़कों पर लेट कर अपना प्रदर्शन कर रहे हैं।

हाइवे से किसानों के जत्थे के साथ गुजर रहे भारतीय किसान यूनियन के प्रांतीय प्रभारी आशु चौधरी को जब पुलिस ने रोका तो उन्होंने बताया कि वह अयोध्या प्रभु श्रीराम, हनुमानगढ़ी जाकर दर्शन करना चाह रहे थे, मगर प्रशासन उन्हें जाने नहीं दे रहा है। अयोध्या जाकर वह भगवान से किसानों के लिए प्रार्थना करना चाह रहे थे क्योंकि आज शनिवार था। आशु चौधरी ने कहा कि रेल का निजीकरण हुआ तो पटरियां उखाड़ देंगे, बसों का हुआ तो बसें रोक देंगे और भारत का किसान अडानी और अम्बानी को सबक सिखाने के लिए उनके सभी उत्पादों का वहिष्कार करेंगे और सभी लोग जिओ के सिम का परित्याग करेंगे। उनका आंदोलन कोई रोक नहीं सकता और अब और तेज आंदोलन होगा।

उधर किसानों को रोके जाने से नाराज किसानों ने हाइवे को जाम करना शुरू कर दिया है और प्रशासन के मनाने पर वह सड़कों पर लेट कर अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया है, हालाकि प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस किसानों को मनाने में जुटी हुई है मगर किसान हैं कि मानता नहीं।

Published on:
12 Dec 2020 06:43 pm