
मंत्री संजय गंगवार के बयान का किया समर्थन, अखिलेश यादव की सरकार पर लगाए पक्षपात के आरोप (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Pasmanda Community WasimRain : उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक और पसमांदा समाज को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राइन ने बाराबंकी में मीडिया से बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुस्लिम वोटरों को लेकर मंत्री संजय गंगवार द्वारा दिए गए बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मंत्री ने जो बात कही है, वह भले ही कुछ लोगों को कड़वी लगे, लेकिन उसमें सच्चाई है। उन्होंने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ सरकार में पसमांदा मुसलमानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है और किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया।
वसीम राइन के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। खासकर ऐसे समय में जब विभिन्न राजनीतिक दल आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए पसमांदा मुस्लिम समुदाय तक अपनी पहुंच बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। राइन ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ जाति और धर्म से ऊपर उठकर लोगों तक पहुंचा है, जिसका फायदा पसमांदा समाज को भी मिला है।
मीडिया से बातचीत के दौरान वसीम राइन ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में पसमांदा मुसलमानों को मिला है। उन्होंने कहा कि लाभार्थियों का चयन किसी धर्म या समुदाय के आधार पर नहीं, बल्कि पात्रता के आधार पर किया गया।
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को घर मिले हैं और आयुष्मान कार्ड के माध्यम से लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हुई हैं। राइन ने कहा कि पसमांदा समाज के लोगों ने भी इन योजनाओं का लाभ उठाया है और सरकार ने उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया। उनका कहना था कि पहली बार ऐसा महसूस हुआ है कि योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को राहत मिली है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
वसीम राइन ने समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में सभी वर्गों को समान अवसर नहीं मिले। उनके अनुसार उस समय विशेष रूप से एक वर्ग को प्राथमिकता दी गई और अन्य समुदायों की उपेक्षा हुई।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा मुस्लिम हितैषी होने का दावा करती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर पसमांदा मुसलमानों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व और सुविधाएं नहीं मिल सकीं। राइन ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर पक्षपात देखने को मिला था। हालांकि समाजवादी पार्टी लगातार इन आरोपों को खारिज करती रही है और उसका कहना है कि उसने सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य किया है। लेकिन वसीम राइन का बयान इस बहस को फिर से राजनीतिक केंद्र में ले आया है।
अपने बयान में वसीम राइन ने मुस्लिम वोटिंग पैटर्न को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक बड़ा वर्ग सरकारी योजनाओं का लाभ तो ले रहा है, लेकिन मतदान के समय अलग निर्णय करता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर समाज के भीतर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
राइन का कहना था कि किसी भी लोकतंत्र में मतदाता अपनी पसंद से वोट देने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन यह भी जरूरी है कि लोग विकास और योजनाओं के आधार पर राजनीतिक दलों का मूल्यांकन करें। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक राजनीतिक सोच के आधार पर निर्णय लेने के बजाय विकास कार्यों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
पिछले कुछ वर्षों में पसमांदा मुस्लिम समाज देश और प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। विभिन्न राजनीतिक दल इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा भी लगातार पसमांदा समाज तक पहुंच बनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
मनोज उपाध्याय (राजनीतिक विश्लेषक) का कहना है कि पसमांदा मुसलमानों की बड़ी आबादी कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यही कारण है कि सभी प्रमुख दल इस वर्ग के मुद्दों और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं। वसीम राइन का यह बयान भी इसी व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा माना जा रहा है। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि पसमांदा समाज के भीतर विकास, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ रहे हैं।
बाराबंकी में दिया गया यह बयान केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह बयान आगामी चुनावी रणनीतियों और सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच पहले से ही तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चल रही है और ऐसे बयानों से बहस और तेज हो सकती है। वसीम राइन ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी दल विशेष का प्रचार करना नहीं, बल्कि पसमांदा समाज की वास्तविक स्थिति और अनुभवों को सामने रखना है। उन्होंने कहा कि समाज के विकास और सम्मान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और इसी आधार पर राजनीतिक मूल्यांकन होना चाहिए।
वसीम राइन के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। भाजपा समर्थक इसे अपनी योजनाओं की सफलता का प्रमाण बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहे हैं। फिलहाल, बाराबंकी से आया यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में पसमांदा मुस्लिम समाज की भूमिका और उसके राजनीतिक रुझानों को लेकर नई बहस को जन्म दे चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, जिससे प्रदेश का राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है।
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राइन ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव और मुस्लिम वोटरों के बारे में मंत्री संजय गंगवार के बयानों पर कहा, "मंत्री जी ने जो बात कही है, वह कड़वी है लेकिन सच है। योगी सरकार में पसमांदा मुसलमानों को फायदा तो मिला है चाहे आवास का हो या आयुष्मान कार्ड का हो। किसी के साथ भेदभाव नहीं रहा। अखिलेश यादव की सरकार में भेदभाव रहा है। हमेशा यादवों को उन्होंने फायदा पहुंचाया है। मुसलमान जिस तरह योजनाओं का फायदा ले रहा है लेकिन भाजपा को वोट नहीं कर रहा है..."
Published on:
14 Jun 2026 03:55 pm
बड़ी खबरें
View Allबाराबंकी
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
