मूर्ति विसर्जन विवाद: पुलिस के ताण्डव से लोगों में आक्रोश, बीजेपी विधायक के खिलाफ भी गुस्सा
बाराबंकी.योगी आदित्यनाथ की छवि शुरू से ही एक कट्टरवादी हिन्दू नेता के रूप में रही है। जिसको लेकर प्रदेश का हिन्दू समाज गौरव महसूस करता है। मगर बाराबंकी में जो कुछ हुआ वह मुख्यमंत्री योगी की हिन्दूवादी छवि को धक्का पहुंचा है। यहां देवी माता के भक्तों पर आधी रात को ऐसा पुलिसिया कहर टूटा जिसे वह कभी भूल नहीं पायेंगे । ग्रामीणों का आरोप यह भी है कि पुलिस वालों ने मूर्तियों को खण्डित कर उसे एक पिकअप वाहन में लाद कर जबरन विसर्जित कर दिया।
मामला बाराबंकी जनपद के थाना मोहम्मदपुर खाला इलाके के बेलहरा कस्बे के है। जहां विसर्जन के लिए एक रास्ते के विवाद में इलाके के लोग काफी आन्दोलित हो गए। मामला दरअसल कुछ यूं हुआ कि बेलहरा कस्बे के रास्ते से होकर मूर्तियों को विसर्जन के लिए जाना था। मगर जब मूर्तियां जब उस रास्ते पर पहुंची तो रास्ता बन्द दिखाई दिया। इस रास्ते को प्रशासन ने बल्लियों के सहारे बन्द कर रखा था। लोगों ने रास्ता खोलने की जब बात की तो उनसे कहा गया कि इस रास्ते पर जाने से विवाद बढ़ेगा इसलिए मूर्ति को दूसरे रास्ते से लेकर जाएं । तब -तक पीछे से और मूर्तियां आ गयी और कस्बे के रास्ते से ही निकलने की जिद करने लगे।
जैसे -जैसे मूर्तियां विसर्जन के लिए वहां इकट्ठी होती गयी तो उसके साथ आई भक्तों की भीड़ भी बढ़ने लगी। सभी भक्त उसी रास्ते से विसर्जन के लिए जाने की जिद पर अड़ गए। रास्ता न दिए जाने की स्थिति पर वह लोग वहीं बैठ गए और विसर्जन न किये जाने पर अड़ गए । स्थिति बिगड़ती देख मौके पर आला अधिकारियों की फौज पहुंच गयी और मान - मनौवल शुरू कर दी। मगर मूर्तियों के साथ आये भक्तों ने विसर्जन न करने की जिद नहीं छोड़ी और वहीं पूजा-पाठ करने लगे। इस दौरान जिले के सभी अधिकारियों के हाथ - पैर फूलते रहे। नागरिकों ने विवाद की आशंका के चलते क्षेत्रीय भाजपा विधायक को फोन भी किया मगर विधायक वहां नहीं पहुंचे जबकि विधायक इलाके में ही थे ।
सुबह से चला यह विवाद देर रात तक भी हल नहीं हो सका। लोगों का आरोप है कि आधी रात के बाद पुलिस ने पहले इलाके की बिजली कटवाई फिर जिन लोगों ने दिन में इस आंदोलन की अगुवाई की थी उनके घरों में घुस कर उनपर लाठियां बरसाई । इस दौरान पुलिस ने महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा। अचानक हुई इस पुलिसिया कार्रवाई से लोग हतप्रभ हो उठे और अपनी जान बचाने के लिए भाग खड़े हुए । ग्रामीणों की अगर माने तो पुलिस ने उनके द्वारा रोकी गयी कई वाहनों से लाई गई मूर्तियों को तोड़ -तोड़ कर पहले उसे एक पिकअप वाहन में भरा फिर जबरन खुद ही विसर्जित कर दिया ।
भारी पुलिस बल के एकसाथ आने और उनके ताण्डव से घबराए ग्रामीण कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। ग्रामीणों की अगर माने तो सबेरे से ही जब से यह विवाद शुरू हुआ तब से वह लोग क्षेत्रीय भाजपा विधायक साकेन्द्र वर्मा को फोन कर मौके पर आने के लिए कहते रहे और विधायक उनसे डटे रहने की बात कहते रहे मगर विधायक जी इलाके में होने के बावजूद मौके पर नहीं पहुंचे और रात होते ही अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लिया । विधायक के इस कृत्य से लोंगों में आक्रोश व्याप्त है ।
ग्रामीणों को सही मायने में इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई की उम्मीद ही नहीं थी । वह यह समझ रहे थे कि प्रदेश में योगी की हिन्दूवादी सरकार के होने के कारण उन्हें विसर्जन के रास्ते में नहीं रोका जाएगा और अगर विवाद हुआ भी तो क्षेत्रीय भाजपा विधायक उसे सम्भाल लेंगे ।मगर उन्हें सरकार और विधायक की तरफ से निराशा ही हाथ लगी । अब यहां के नागरिक विधायक को कोसते साफ देखे जा सकते है ।