
बारां. आपातकाल के बाद 1977 में प्रदेश में जब विधानसभा चुनाव हुए तो जनता पार्टी की सरकार बनी थी, तब विपक्ष के दिग्गज भैरोङ्क्षसह शेखावत को मुख्यमंत्री चुना गया था, लेकिन शेखावत तब विधायक नहीं थे। उनके लिए छबड़ा के विधायक प्रेमसिंह सिंधवी ने विधायक पद से इस्तीफा दिया था। बाद में उपचुनाव के लिए शेखावत जयपुर से जोंगा जीप से छबड़ा के लिए रवाना हुए थे। उनके साथ प्रेमसिंह सिंधवी के अलावा अटरू के जनसंघ नेता नंदलाल बरलां व छीपाबड़ौद के जनता पार्टी के नेता भरतलाल बाठला थे। तब बारां से छबड़ा के लिए गिट्टी रोड हुआ करता था। अटरू से कवाई के बीच तो पांच-छह किलोमीटर का पठार था। शेखावत की जीप अटरू पहुंची तो रात हो चुकी थी, जीप में क्षेत्र के तीन लोग सवार थे, ऐसे में उन्हें रास्ते को लेकर कोई ङ्क्षचता नहीं थी। लेकिन, शेखावत की जीप जब पठारी क्षेत्र में पहुंची तो चालक रास्ता भटक गया।
दो बार चुनाव लड़े
देश में आपातकाल के दौरान राजनीति में सक्रिय रहे बारां के पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष यशभानु जैन का कहना है कि शेखावत का छबड़ा ही नहीं बारां जिले के लोगों से भी आत्मीयता का रिश्ता रहा था। वे दूसरी बार भी छबड़ा से चुनाव लड़े थे और विजयी रहे थे। लेकिन, तब वे पाली जिले से भी चुनाव जीते थे। ऐसे में उन्होंने छबड़ा विधानसभा सीट से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद भी वे बारां, छबड़ा के पार्टी नेताओं से जीवंत सम्पर्क में रहे। उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले उन्होंने बारां जिले का दौरा कर पुराने नेताओं से घरों पर पहुंच मुलाकात की थी।
हाड़ौती से पहले मुख्यमंत्री थे शेखावत
हाड़ोती क्षेत्र से भैरोङ्क्षसह पहले ऐसे नेता थे, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि वे यहां के रहने वाले नहीं थे। उनके बाद वर्ष 2003 में हाड़ौती से चुनाव जीतकर वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनी थी। शेखावत की सादगी से जिले के लोग खासे प्रभावित है। आज भी कई नेता उनके किस्से सुनाकर लोगों को राजनीति की सीख देते थे।