नहीं है कोई चांदपुरा व रपटावन व भवानीपुरा तथा सांगाहेड़ी का निवासी
बारां. जिले में दर्जनों ऐसे गांव हैं, जिनका सरकारी रिकार्ड में नाम तो दर्ज है, लेकिन इन गांवों में कोई रहता नहीं है। सिर्फ नाम के ही गांव हैं। यहां कभी आबादी हुआ करती थी। अब केवल राजस्व रिकार्ड में ही ऐसे गांव मौजूद है। वर्ष 2011 से पूर्व बीते कई दशकों में ग्रामीण गांवो को छोड़कर अन्यत्र चले गए या शहरो की और पलायन कर गए। यूं तो जिले में 1224 गांव है। लेकिन इनमें 111 गांव महज कागजो में ही है। यह तथ्य वर्ष 2011 में हुई जनगणना के दौरान सामने आया।
गांव तो हंै ग्रामीण नहीं
जिले की आठ तहसीलो में बारां तहसील में चांदपुरा व रपटावन में कोई नहीं रहता है। अन्ता तहसील के बिलेण्डी व सांगाहेड़ी, अटरू के बारापाटी तथा भवानीपुरा, छबड़ा के आशापुरा, सुभानपुर कदीम, वजीरपुरा, बौरखेड़ी, निजामखेड़ी, अमानपुरा, छीपाबड़ौद के कांकड़दा, आंचलपुर, हिन्डोला, बांसपुरा, खांखरा, मदनपुरा समेत किशनगंज के 21 गांव मांगरोल के 6 गांव तथा शाहाबाद के 66 गांव अब मानव रहित हैं।
शाहाबाद क्षेत्र में बिना आबादी के सर्वाधिक गांव
जिले के शाहाबाद क्षेत्र में सर्वाधिक 66 ऐसे गांव हैं। जहां पर कोई भी नहीं रहता है। किशनगंज क्षेत्र में 21 गांव ऐसे हैं जो गैर आबादी के हैं। बारां, अटरू तथा अन्ता में दो-दो गांव बिना घरो व आबादी के ही अपना वजूद बनाए हुए हैं। सर्वाधिक गांव वाला शाहाबाद क्षेत्र है, जहां पर 236 गांव राजस्व रिकार्ड के अनुसार मौजूद है।
नई जनगणना पर बदलेगी तस्वीर
जिले में यूं तो 1224 गांव हैं। जिनमें 1113 गांव आबाद हैं। वहीं, 111 गांव आबादी विहीन है। लेकिन अब आगामी समय में जनगणना होने पर कई गांवों की तस्वीर बदलती हुई नजर आएगी।
एसएन आमेठा, अतिरिक्त जिला कलक्टर