
बारां में भारतीय जनता पार्टी हमेशां से किलेदार की माफिक रही है। यहां से सांसद की राज्य सरकार में तूती बोलती है। इसके बावजूद एक युवा ने भाजपा को नगर परिषद सभापति चुनाव में ऐसा धोया कि पार्टी की सारी रणनीति फेल हो गई। हम बात कर रहे हैं नव-निर्वाचित सभापति कमल राठौर की। ३४ साल के इस युवा और वरिष्ठ नेता प्रमोद जैन भाया ने ना केवल कांग्रेस को जिताया बल्कि भाजपा के खेमे में तोडफ़ोड़ भी कर दी। भाया ने यहां ढाई साल पहले राजनीति में आए कमल राठौर पर दांव खेला था। राठौर ढाई साल पहले तक एबीवीपी से जुड़े थे। लेकिन उन्हें भाजपा ने पार्षद चुनाव में टिकट नहीं दिया था।
बारां. नगरपरिषद सभापति चुने गए कमल राठौर ने करीब ढाई साल पहले ही भाजपा का दामन थामा था। इससे पहले वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद व भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय थे। नगरपरिषद के आम चुनाव में वार्ड १७ से उन्होंने भाजपा से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया। युवाओं में पैठ रखने के कारण कांग्रेस नेताओं ने राठौर को पार्टी में शामिल कर इसी वार्ड से उम्मीदवार बनाया। शानदार जीत दर्ज करने पर उन्हें उपसभापति पद भी दिया। कुछ माह पूर्व आमचुनाव में सभापति चुने गए प्रेम सांखला के निधन के बाद उन्होंने सभापति का कार्यभार संभाला था। गत १७ दिसम्बर को दो वार्डों के उपचुनाव हुए थे। इसकी मतगणना में दोनों वार्डों में कांग्रेस उम्मीदवार विजयी रहे थे। सभापति के चुनाव में कांग्रेस ने राठौर पर भरोसा कर उन्हें उम्मीदवार बनाया। इसमें उन्होंने शानदार जीत दर्ज की।
अनैतिक जोड़-तोड़
बारां. नगरपरिषद के सभापति की कुर्सी हथियाने के लिए की गई अनैतिक जोड़-तोड़ को राजस्थान पत्रिका ने २० दिसम्बर के अंक में 'सिखाएगी जनता ही सबकÓ शीर्षक से टिप्पणी के रूप में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। पत्रिका का यह आकलन सटीक रहा। कांग्रेस उम्मीदवार को २४ की बजाए २७ मत मिलने से इसकी पुष्टि भी हो गई। वैसे भाजपा नेता इस चुनाव में २५ मत मिलने को लेकर आश्वस्त थे तो कांग्रेस नेता २८ अथवा २९ मत मिलने का दावा कर रहे थे। मतगणना के बाद ऐनवक्त पर कुछ पार्षदों के पाला बदलने से तस्वीर साफ हो गई।