केलवाड़ा क्षेत्र में इस वर्ष होगी धान की अधिक बुवाई
केलवाड़ा. क्षेत्र के आसपास लगने वाली 10 पंचायतों में खरीफ फसल धान की जमकर बुवाई होगी। अगर बारिश अच्छी होती है तो यह क्षेत्र में मक्का, सोयाबीन के बाद धान प्रमुख फ़सल हो सकती है। केलवाड़ा के एग्रीकल्चर सुपरवाइजर सूरज प्रकाश मेहता ने बताया कि कस्बे के खाद, बीज विक्रेताओं से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर अब तक धान का 585 ङ्क्षक्वटल प्रमाणित बीज किसानों ने खरीदा है। इस बीज की नर्सरी से लगभग 2000 हैक्टेयर में धान लगाई जाएगी। इसके अलावा किसान अपने स्तर पर स्वयं का बीज भी काम में लेंगे। धान की किस्मों में पूसा बासमती-5 किसानों की पहली पसंद है। इसके अतिरिक्त इस वर्ष पूसा 1692, पूसा 1509, पूसा1718 किस्मों की नर्सरी लगाई है। अभी कुछ किसान नर्सरी लगा चुके हैं, कुछ लगा रहे है। किसानों डीएसआर विधि (धान की सीधी बुबाई) के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इस विधि से धान की खेती करने पर पानी की बहुत बचत होती है और उत्पादन लागत भी कम आती है। सूरज मेहता ने बताया कि इस विधि से धान की खेती की तकनीकी जानकारी किसानों को दी जा रही है।
इधर, प्याज-लहसुन की फसल घाटे का सौदा
बोहत. क्षेत्र के गांव के लहसुन प्याज उत्पादक किसान इस बार यह फसल घाटे का सौदा साबित हो रहा है।इस बार मंडी के भावों से अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहा है। ऐसे में किसान और ज्यादा कर्जदार हो गया है। किसान मुकेश गुर्जर का कहना है कि मौसम की मार झेलने के साथ प्याज-लहसुन की फसल में लागत का पैसा भी नहीं मिल रहा है। बढ़ती मंहगाई के चलते फसल के उत्पादन में पिछले साल से इस बार लागत दुगनी हो चुकी है, लेकिन फिर भी किसानों को दोनों फसल के सही दाम नही मिल रहे हैं। तापमान बढने से किसान द्वारा खेतों से तैयार करके लाई फसल कट्टों में भरने से खराब होने का भी डर भी किसानों को सताने लगने लगा है।