कोयला कस्बे सहित क्षेत्र में फसलों के अनुरूप बारिश नहीं होने से किसान उदास हो रहे हैं। पानी की कमी के कारण धान की फसल भी सूखने लगी है।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क/बारां। कोयला कस्बे सहित क्षेत्र में फसलों के अनुरूप बारिश नहीं होने से किसान उदास हो रहे हैं। पानी की कमी के कारण धान की फसल भी सूखने लगी है। सोयाबीन की फसल में इल्लियों का कहर भी झेलना पड़ रहा है। किसानों ने खेतों में फसल की बुवाई करने को लेकर खाद-बीज उधार लेकर बुआई की थी। किसानों ने बताया कि बारिश नहीं होने के चलते फसलें सूख कर पीली पड़ने लगी हैं।
गत वर्ष भी ज्यादा बारिश के कारण सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई थी, अब बारिश न होने से नुकसान हो रहा है। बारिश नहीं होने से किसानों को सिंचाई शुरू करनी पड़ रही हैं। किसानों को कृषि के लिए केवल 6 घंटे विद्युत मिलती है, उसमें भी कई बार ट्रिपिंग होने से सिंचाई प्रभावित हो रही है। किसानों ने 8 घंटे कृषि विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने की मांग की है।
किसानों ने बताया कि सोयाबीन की फसल को अभी पानी की जरूरत है, क्योंकि अधिकांश फसल में फलियां आ चुकी है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि बारिश कब होगी। सोयाबीन की फसल पकने तक अभी कुछ-कुछ दिनों के अंतराल से बारिश की जरूरत है। गौरतलब है कि इस बार किसानों ने महंगा बीज बाजार से खरीदा है, जिससे लागत भी बहुत ज्यादा लगी है।
सोयाबीन में 60, धान में 72 हजार प्रति हैक्टेयर का खर्च: महंगा बीज और खर्चे के कारण किसान पर कर्ज बढ़ता जा हैं। किसान रविंद्र सुमन और चन्द्रस्वामी ने बताया कि इस वर्ष धान का महंगा बीज खरीद कर पौध तैयार की थी। महंगे दामों में खेतों गरढ़ मचाकर मजदूरों ने धान के पौधे की रोपाई करवाई गई थी। शुरू में हुई बारिश से धान की फसल लहलहाने लगी थी लेकिन गत एक माह से बारिश नहीं होने के करण अब धान की फसल के खेतों में दरारें पड़ने से धान की फसल पीली पड़ने लगी है। अब तक धान की फसल में करीब 12 हजार रुपये प्रति बीघा तक का खर्चा भी किया जा चुका है। ऐसे में किसान बारिश की कमी से दोहरी मार झेल रहा है। वहीं सोयाबीन की फसल में बीज, हकाई, उराई, बुवाई, निंदाई, दवाई आदि का 10 हजार रुपए प्रति बीघा खर्चा हो चुका है, अब अगर एक बारिश हो जाए तो किस की झोली धन-धान्य से भर सकती है।
खराब हो जाएगी फसल: किसानों ने बताया कि बारिश नहीं हुई तो सोयाबीन की फसल खराब हो जाएगी। फूल और फलियों पर इसका असर दिखने लगा है। सोयाबीन की फसल खराब होने से किसानों को ज्यादा नुकसान होगा।
कई किसानों की उड़द की फसल बर्बाद: उड़द की फसल पहले ही पीले मौजेक के कारण खराब हो चुकी है। अब किसानों को सोयाबीन से उम्मीद थी, लेकिन उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है। धान की फसल पर भी असर दिख रहा है। जिन खेतों में पानी भरता है वहां तो स्थिति ठीक है, जिन खेतों में पानी नहीं रुकता है वहां धान की फसल भी प्रभावित हुई है।
सोयाबीन को सबसे ज्यादा नुकसान: सोयाबीन खरीफ मौसम की प्रमुख फसल है। किसानों की अर्थव्यवस्था इसी फसल पर निर्भर करती है। कोयला क्षेत्र में सबसे बड़े क्षेत्र में बोई जाने वाली फसल सोयाबीन है। लेकिन इस समय बढ़ती गर्मी के कारण फसलों पर असर पड़ा है। जरूरत के समय बारिश नहीं होने से उत्पादन में गिरावट आना तय है। इस साल भी कोयला क्षेत्र में सर्वाधिक रकबे में सोयाबीन की बुवाई हुई है। इससे इस फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
किसानों के सामने फसलों को बचाने की चिंता: देवरी में बीते एक माह से क्षेत्र में बारिश नहीं होने के चलते किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। हालांकि बीते सप्ताह हल्की बारिश हुई थी। इनसे फसलों को मामूली राहत तो मिली, पर अभी और बारिश की जरूरत है। खेतों में गर्मी के चलते फसलों में कीट का प्रकोप बढ़ गया है। कई खेतों में इल्ली इतनी अधिक है कि किसानों को इसका कोई हल नहीं समझ आ रहा। कई किसानों के खेतों में समय पर कीटनाशक दवाइयां होने के चलते कीट का प्रकोप कम नजर आ रहा है। इल्ली प्रकोप होने के चलते सोयाबीन की फसल में अधिक नुकसान देखने को मिल रहा है। इन खेतों में पत्तों को पूरी तरह से कीट प्रकोप ने छेद दिया। वहीं कई खेतों में सोयाबीन की फली को इल्ली ने नष्ट करना शुरू कर दिया है। इसके चलते किसने को नुकसान अधिक हो रहा है। किसानों का मानना है कि अगर समय पर बारिश होती रहती है तो यह इल्ली पैदा नहीं होती। खेतों में उमस और गर्मी से कई प्रकार की बीमारियां फसलों को लग रही हैं।
जिन किसानों के खेतों में सोयाबीन की फसल में इल्ली प्रकोप है, उन्हें समय पर कीटनाशक दवाइयां का छिड़काव करते रहना चाहिए। किसानों को क्लोरोपाइरीफोस या इ़डेक्सोकार्बा या कोराजीन का छिड़काव कर देना चाहिए। इससे 20-25 दिन तक इल्ली पर रोकथाम लग जाएगी। फिर फली कड़क हो जाएगी तो वे इसे नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगी।
रामभजन माली, कृषि सुपरवाइजर: क्षेत्र में बारिश नहीं हो रही है, ऐसे में किसान खरीफ की फसल में फव्वारा से हल्की सिंचाई कर सकते हैं। खरीफ की फसल की पैदावार के लिए बारिश का होना बहुत जरूरी है, इसके अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है।-रविंद्र नागर, सहायक कृषि अधिकारी, कोयला
बर्बाद हो चुकी सोयाबीन फसल का तुरंत दे मुआवजा: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश यादव ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अवगत कराया है कि सोयाबीन की फसल बरसात नहीं होनें से चौपट हो रही है। ऐसे में सिंचाई के लिए 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध करवाई जाए। वहीं बीमा कम्पनी को को भी निर्देशित कर शीघ्र भरपूर मुआवजा दिलवाना सुनिश्चित किया जाए। यादव ने मुख्यमंत्री को भेजे ईमेल में कहा कि अगस्त में बरसात नहीं सोनें से सोयाबीन की फलियों में दाने विकसित नहीं हो रहे हैं। ट्यूबवेल से सिंचाई करें भी तो औसत 4 घंटे बिजली मिल रही है। इस आपदा से निपटने के लिए किसानों को तुरंत पर्याप्त बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
पहले बरसात की कमी, अब इल्ली का हमला: मऊ में बरसात नहीं होने और गरमी, उमस के कारण सोयाबीन की फसल में इन दिनों इल्ली का प्रकोप दिखाई देने लगा है। इससे किसान चिंतित हैं। किसान इल्ली प्रकोप से फसलों की सुरक्षा के लिए हजारों रुपए खर्च बाजार से कीटनाशक दवाएं खरीद कर सोयाबीन की फसल फर स्प्रे कर रहे हैं। पहले किसान खरपतवार नाशक दवाओं के छिड़काव कर निपटे ही थे कि फसल को इल्ली प्रकोप ने घेर लिया है। इसके उन्मूलन पर फिर दवाओं के छिडकाव कर फसलों को इल्ली प्रकोप से बचाने में लगे हैं। इससे फसल की लागत बढती जा रही है। इससे किसानों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। कई किसान कर्जा लेकर फसलों को बचाने में लगे हैं।