
बारां जिला मुख्यालय के पास के ही गांव सुन्दलक में जिस तरह पूरे गांव को खोद-खोद कर मिट्टी निकाली जा रही है उससे यह गांव अब उजाड़ नजर आने लगा है। माफिया ने इतनी मिट्टी निकाली कि अब जमीन से पानी आने लगा है। कईं जगह तो तलाइयां भर गई हैं। माफिया ने सरकारी तालाब और पुलिस द्वारा तालाब तक को खोद दिया है। बताया जाता है कि हाडौती के एक बड़े नेता ने कोई कान्ट्रेक्ट लिया है। उसी नेता ने स्थानीय नेताओं के दो छुटभय्यों को मिट्टी का ठेका दिया है। यह छुटभ्य्ये ही यहां से इतनी मिट्ट्ी निकाल चुके हैं कि जमीन भी आंसू निकालने लगी है। इधर नेताओं के संरक्षण के चलते प्रशासन भी आंखे मूंदे बैठा है। खननकर्ताओं ने जहां मर्जी आई, जमीनों को छलनी किया। गांव में सीताराम मेहरा के खेत से सटी जमीन पर पिछले साल बारिश बाद से खुदाई शुरू की गई। उसके अनुसार मशीनों की मदद से खुदाई कर लम्बे-चौड़े हिस्से में तीस-पैंतीस फीट गहरा गड्ढा कर दिया गया। दायरा बढ़ता-बढ़ता एकदम खेत के पास ही आ गया, खेत से सटा एक हिस्सा ढह भी गया। पिछले कई दिनों से अधिकारियों के पास जाकर गुहार करता आ रहा है। कुछ दिन पहले जिला कलक्टर आए थे, उन्होंने गड्ढा बंद कराने को कहा था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
गांव में खेमजी महाराज धार्मिक स्थल से सटी जमीन पर नवीन तलाई खुदाई कार्य, चरागाह भूमि पर खाई खुदाई व वृक्षारोपण कार्य2016-17 में हुआ। इसके लिए 25.88 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे जिसमें से9.34 लाख रुपए अब तक व्यय हुए हैं। यहां भी खनन माफिया पीछे नहीं रहे। मनरेगा के तहत हुए काम का स्वरूप बिगाड़ दिया गया।
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प्रभावशालियों का हाथ
ग्रामीणों का कहना है कि खनन कार्य में प्रभावशाली लोगों का हाथ है। एक जगह किसी काम में बड़े पैमाने पर मिट्टी की जरूरत है। वहां का ठेका लेने के बाद मशीनों से मिट्टी की खुदाई सुन्दलक से कर वहां पहुंचाई जा रही है।
जगह-जगह की गई खुदाई के बाद निकली उपयोगी मिट्टी को खननकर्ता यहां से ले गए व अनुपयोगी मिट्टी के जगह-जगह ढेर लगा दिए गए। छोटे तालाब में तो बड़े हिस्से में ढेर लगे हैं।