बारां-अटरू के विधायक पानाचंद मेघवाल ने पूछा था सवाल
बारां. साइबर क्राइम के मामलों की जांच में कोटा संभाग की पुलिस को वांछित सफलता नहीं मिल रही। संभाग के चारों जिलों की पुलिस ने साइबर क्राइम के 226 मामलों में से 164 में एफआर लगाई तो 30 पेंडिंग चल रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से यह जानकारी बारां-अटरू विधायक पानाचंद मेघवाल के सवाल के जवाब में दी गई है।
विधायक पानाचन्द द्वारा पूछे गए विधानसभा प्रश्न के जवाब में सरकार ने अवगत कराया कि संभाग में विगत वर्ष 2018, 2019 व 2020 में ऑनलाइन धोखाधड़ी व साइबर क्राइम के कोटा शहर में 158, कोटा ग्रामीण में 10, बून्दी में 15, बांरा में 23 व झालावाड में 20 समेत कुल 226 प्रकरण दर्ज हुए थे। इनमें 164 प्रकरणों मेें पुलिस ने एफआर (अन्तिम रिपोर्ट) लगा इनकी जांच बंद कर दी। जबकि 32 प्रकरणो में न्यायालयों चालान पेश किए गए हैं। ऐसे मामलों में 52 अपराधियों की गिरफ्तारी हुई है।
विधायक पानाचन्द ने सरकार से पूछा कि विगत 2 वर्षो में सरकार ने साइबर अपराधों को रोकने के लिए क्या क्या निर्णय लिए। जिसके जवाब में सरकार ने बताया कि साइबर अपराधों को रोकने के लिए महानिदेशक पुलिस राजस्थान जयपुर के आदेश के अनुसार साइबर पुलिस थाने के समस्त प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के स्थान पर अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एटीएस एवं एसओजी राजस्थान जयपुर के अधीन किए गए हैं। राजस्थान सरकार गृह ग्रुप 2 विभाग के आदेश के अनुसार एसओजी के अधीन साइबर अपराध इन्वेस्टिगेशन इकाई का गठन किया गया। सीसीआइयू में एक कांस्टेबल,एक ऑपरेटर व एक कांस्टेबल चालक का पद स्वीकृत किया गया है। समय समय पर परिपत्र जारी कर किए जा रहे हंै। साइबर क्राइम इन्वेस्टीगेशन यूनिट का गठन किया गया है। जिसमें पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी का पदस्थापन किया गया है। साइबर अपराधों पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस अकादमी जयपुर में साइबर क्राइम प्रिवेंसन अंगेस्ट वुमेन एंड चाइल्ड प्रशिक्षण लैब खोली जाकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।