
बारां. कम बारिश के कारण इस बार जिले में भूजल स्तर गहरा रहा है। सिंचाई के लिए किसान धरती का सीना चीर पानी ला रहे है।
इसका असर जलापूर्ति के काम आने वाले नलकूपों व हैंडपम्पों पर भी पड़ रहा है। ऐसे हालातों में इस बार गर्मी ही नहीं बल्कि सर्दी के दिनों में ही गांवों में पेयजल टैंकर चलाने की स्थिति आ रही है। जलदाय विभाग की ओर से भी स्थिति भांप ली गई है। ऐसे में कन्टीजेंसी प्लान तैयार कर ऊपर भेज भी दिया गया है। विभाग के सूत्रों ने बताया कि जिले में करीब डेढ़ सौ गांव ऐसे हैं, जहां दिसम्बर माह से ही टैंकर चलाने पड़ सकते हैं। दो दिन पहले जिले के दौरे पर आए विभाग के प्रमुख शासन सचिव को भी अधिकारियों ने जिले के हालात से अवगत कराया।
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यूं आई है दिक्कत
जिले में इस बार औसत बारिश से 35 से 40 फीसदी बारिश कम हुई है। ऐसे में कई बांध-तालाबों में काफी कम पानी है। भूूजल रिचार्ज भी नहीं हो पाया है। जिले में पहले ही भूजल स्तर गिरता जा रहा था, इस बार कोढ़ में खाज वाली बात हो गई। फिर अब सिंचाई के समय किसानों को फसलों की प्यास बुझाने के लिए नलकूप चलाने पड़ रहे हैं। ऐसे में धरा का पानी नलकूप सोख रहे हैं, इससे पेयजल आपूर्ति वाले नलकूप व हैंडपम्पों पर भी असर पड़ रहा है।
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इन क्षेत्रों में ज्यादा परेशानी
जलदाय विभाग के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जिले के अटरू, शाहाबाद, छीपाबड़ौद व किशनगंज तहसील क्षेत्रों में ज्यादा दिक्कत है। जिले के अटरू कस्बे में कई नलकूपों में पानी रीतने से अब तीन की जगह चार दिन में पेयजल आपूर्ति शुरू की जा रही है तो उधर आदिवासी बहुल शाहाबाद में भी अभी से एकांतरे जलापूर्ति की जाने लगी है। किशनगंज व छीपाबड़ौद तहसील क्षेत्र के कई गांवों में भी जलापूर्ति के स्रोत नलकूप रीतने लगे हैं।
ठीक नहीं भूजल स्तर के हाल
जिले के सात ब्लॉकों में से सर्वाधिक चिंताजनक हालात अटरू एवं बारां ब्लॉक के हैं जहां जल का अतिदोहन होता है। अटरू ब्लॉक में 2016 के प्री मानसून सर्वे में भूजल स्तर का आंकड़ा 20.06 मीटर तक पहुंच गया था तो बारां ब्लॉक में भूजल स्तर15.54 मीटर तक जा पहुंचा। मौजूदा समय में जिले के कई क्षेत्रों में किसान बोरिंग करा रहे हैं, लेकिन काफी नीचे तक भी पानी नहीं निकल रहा। सिंचाई के लिए चालू नलकूपों को दिन-रात चलाया जा रहा है।
-सामान्यतया मार्च के बाद टैंकर चलाए जाते हैं, लेकिन इस बार कम बारिश के कारण स्थिति ठीक नहीं है। नलकूपों में पानी नीचे चला गया है। हैंडपम्पों पर भी असर पड़ रहा है। करीब डेढ़ सौ गांवों में ज्यादा दिक्कत आएगी। ऐसे में दिसम्बर माह से ही टैंकर चलाने पड़ सकते हैं। कन्टीजेंसी प्लान ऊपर भेज दिया गया है।
एमपी माथुर, कार्यवाहक अधीक्षण अभियंता
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, बारां
सिंचित क्षेत्र में बुवाई पूरी, असिंचित क्षेत्र में बाकी
बारां. इधर, नवम्बर माह के दूसरे पखवाड़े तक जिले में सिंचित क्षेत्र में तो बुवाई का लक्ष्य पूरा हो चुका है, लेकिन अंसिचित क्षेत्र में अभी भी एक लाख हैक्टेयर में बुवाई नहीं हो पाई है। कृषि विभाग सूत्रों के अनुसार सिंचित क्षेत्र में64 हजार हैक्टेयर लक्ष्रू के विपरीत 63 हजार 400 में बुवाई हो चुकी है लेकिन असिंचित क्षेत्र में 2 लाख55 हजार हैक्टेयर लक्ष्य के विपरीत अभी तक 1 लाख 60 हजार हैक्टेयर में ही बुवाई हुई है। विभाग का मानना है कि 15 से 20 फीसदी रकबा बुवाई से वंचित रह सकता है।