Dol Gyaras Mela: भाद्रपद शुक्ला जलझूलनी ग्यारस को कई मन्दिरों के विमानों (डोल) में विराजे भगवान की शोभायात्रा निकलती है। इस डोल यात्रा के साथ मेले की शुरुआत होती है। पहले सिर्फ 2-3 के लिए मेला लगता था, लेकिन अब एक पखवाड़े तक मेला भरता है।
Ekadashi 2024: राजस्थान में हाड़ौती संभाग के बारां जिले का डोल ग्यारस राज्यभर में प्रसिद्ध है और दूर-दराज से लोग इसे देखने को आते हैं। सिर्फ राजस्थान ही नहीं मध्य प्रदेश में भी इस यात्रा की तारीफे की जाती हैं। अन्नपूर्णा नगरी कहे जाने वाले इस जिले में डोल ग्यारस के दिन देखने लायक माहौल होता है।
भाद्रपद शुक्ला जलझूलनी ग्यारस को कई मन्दिरों के विमानों (डोल) में विराजे भगवान की शोभायात्रा निकलती है। इस डोल यात्रा के साथ मेले की शुरुआत होती है। पहले सिर्फ 2-3 के लिए मेला लगता था, लेकिन अब एक पखवाड़े तक मेला भरता है। मेले में कोटा संभाग के अलावा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई व्यापारी खरीद-फरोख्त के लिए आते हैं।
मेले में देव विमान के साथ अखाड़ेबाजों के हैरत अंगेज करतब आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इसमें भक्तों की भारी भीड़ भजन-कीर्तन करती हुई आगे बढ़ती है तो अखाड़ेबाज युवक-युवतियां करतब करते नजर आते हैं, जिन्हें देखकर लोग 'दांतों तले उंगलियां दबा' देते हैं। लोगों को जैसे जगह मिलती हैं वो उन्हें देखने के लिए पहुंचते हैं। यात्रा के दौरान शहर के बाजारों, मकानों और दुकानों की छतों पर काफी तादाद में लोग इक्कठे हो जाते हैं। सड़कों पर पैर रखने की भी जगह नहीं होती।
बारां स्थित मंदिर श्रीजी के मंदिर से शोभायात्रा शुरू होती है। बताया जाता है कि बूंदी के महाराव सुरजन हाड़ा ने अकबर को रणथंभौर का किला सौंपा था उस समय वहां से 2 देव मूर्तियों लाए थे, जिसमें एक बूंदी और दूसरी बारां स्थापित की गई थी।
इस मंदिर के बगल में एक मस्जिद है साम्प्रदायिक और सद्भाव का पैगाम देती है। जामा मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध इस मस्जिद के बारे में कहा जाता है कि रानी ने इसे मंदिर को बचाने के लिए बसाया था। दरअसल मुस्लिम सम्राट मंदिर को नुकसान न पहुंचाए इसलिए मस्जिद का निर्माण कराया था।