छह माह भी नहीं चला लाखों की लागत से तैयार हुआ स्वीमिंग पूलतैराकी के शौकीन निराश, सरकार से नहीं हो रहा पानी का बंदोबस्त
बारां. राज्य क्रीड़ा परिषद की ओर से शहर में तैराकी को बढ़ावा देने के लिए करीब 92 लाख की लागत से बनाया गया तरणताल खुद अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। हालत देखकर तैराकी के शौकीन निराश हैं। अधिकारी स्थिति नहीं सुधरने से परेशान हैं। तरणताल की सुविधा शुरू करने में की गई मेहनत बेकार हो रही है। तैराकों की जगह पूल में बैक्टीरिया, शैवाल ओर कीट के लार्वा तैर रहे हैं। रासायनिक कीटाणुशोधन की प्रक्रिया के लिए लगाया गया फिल्टर प्लांट शोपीस बना हुआ है। तरणताल को मापदंडों के तहत सुचारू रखने के लिए नियमित रूप से पानी की आवश्यकता है, लेकिन सरकार और प्रशासन से पानी का बंदोबस्त नहीं हो रहा है। पानी नहीं होने के कारण ही तरणताल करीब पांच वर्षो से बंद पड़ा है।
2015 में ही थे ताले
राज्य क्रीड़ा परिषद की ओर से वर्ष 2008-09 में जिला मुख्यालय पर तरणताल बनाने की स्वीकृति दी थी। बजट व अन्य स्वीकृति के बाद वर्ष 2010-11 में इसका निर्माण शुरू हुआ तथा मई 2014 में करीब 92 लाख की लागत से तरणताल के अलावा उसके समीप ही बॉस्केट बॉल व टेनिस कोर्ट का निर्माण कार्य पूरा हो गया था। वर्ष 2015 के जून-जुलाई व अगस्त माह के प्रथम पखवाड़े तक (करीब ढाई माह) नो लोस-नो प्रोफिट में इसका संचालन किया गया। अगस्त 2015 के द्वितीय पखवाड़े से बारिश का दौर शुरू होने के कारण इसे अस्थाई तौर पर बंद कर दिया गया था। उसके बाद 2016 में गर्मी के दिनों में फिर प्रयास किए, लेकिन नलकूप का भूजल स्तर पाताल में चला गया। उसके बाद से अब तक लोग तरणताल शुरू होने की बांट जोह रहे हैं।
जतन पर जतन
वर्ष 2016 से तरणताल शुरू करने को लेकर कई प्रयास किए गए। रखरखाव व संचालन के लिए ऑनलाइन टैंडर बुलाए। इससे पहले उस समय कोटा स्थित तरणताल का संचालन कर रही एक फर्म को ही यहां के तरणताल के संचालन का जिम्मा दिया गया था। उस फर्म की ओर से शुरूआत के कुछ माह संचालन किया। युवाओं ने तैराकी का आनन्द भी लिया, लेकिन यह व्यवस्था अधिक दिनों तक कायम नहीं रह सकी। कुछ अरसा पहले तत्कालीन जिला कलक्टर व उनकी पहल पर सम्बंधित विभागों के अधिकारियों ने मौका स्थिति देखकर जायजा लिया था।
धूल फांक रहा फिल्टर प्लांट
पानी निकासी की समूचित व्यवस्था नहीं होने से सर्दियों के दिनों में भी बारिश का पानी पूरे परिसर में भरा हुआ है। तरणताल परिसर में बने कार्यालय कक्षों में बारिश का पानी भरा हुआ है। इन कमरों के आसपास खाली जगह में चौकीदार के तौर पर रह रहे एक मजदूर परिवार व उसके मवेशियों का बसेरा है। बॉस्केटबॉल व टेनिस कोर्ट में झाड़-झंखाड़ उगे हुए है। यहां भी बारिश का पानी जमा हुआ है। पूल में जहां फिल्टर किया हुआ साफ पानी भरा रहना चाहिए है। वहां धूल-मिट्टी की परतें जम रही है। तैराकी के शौकीनों की चहल-पहल थमी हुई है। न किसी की आवाजाही है, और न कोई छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। इसी तरह परिसर में उद्यान विकसित करने की योजना थी, लेकिन वह भी धरी की धरी रह गई।
भू-जल स्तर गहराने से तरणताल छह माह ही चला। उसके बाद नलकूप खुदवाए गए। कई स्तर पर प्रयास किए, लेकिन पानी का इंतजाम नहीं हुआ। ड्राई क्षेत्र होने से वहां गर्मी के सीजन में पानी नहीं रहता है। दूरी व आबादी नहीं होने से टेनिस व बॉस्केट बॉल के खिलाड़ी भी नहीं पहुंच रहे हैं।
विशाल सिंह, जिला खेल अधिकारी